व्यसायिक शिक्षा,स्वरोजगार लेटेस्ट न्यूज इन हिंदी : बच्चों में छठीं से ही बोएंगे व्यवसाय के बीज,अभी स्कूलों में व्यवसायिक शिक्षा की पढ़ाई नौवीं क्लास से दी जाती है - primary ka master | basic shiksha news | updatemarts | uptet news | basic shiksha parishad up
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    Thursday, 22 February 2018

    व्यसायिक शिक्षा,स्वरोजगार लेटेस्ट न्यूज इन हिंदी : बच्चों में छठीं से ही बोएंगे व्यवसाय के बीज,अभी स्कूलों में व्यवसायिक शिक्षा की पढ़ाई नौवीं क्लास से दी जाती है

    व्यसायिक शिक्षा,स्वरोजगार लेटेस्ट न्यूज इन हिंदी : बच्चों में छठीं से ही बोएंगे व्यवसाय के बीज,अभी स्कूलों में व्यवसायिक शिक्षा की पढ़ाई नौवीं क्लास से दी जाती है


    अरविंद पांडेय, नई दिल्ली । बच्चों में अब 11-12 साल की उम्र से ही व्यवसाय के बीज रोपे जाएंगे, ताकि आने वाली पीढ़ी अकेले नौकरी के ही भरोसे न रहे। सरकार ने स्कूलों में इसको लागू करने की एक बड़ी योजना तैयार की है। इसके तहत बच्चों को छठीं क्लास से ही व्यवसायिक शिक्षा दी जाएगी। इस दौरान इसका कोर्स बिल्कुल ऐसा होगा, ताकि बच्चों में इस दिशा में आगे बढ़ने को लेकर रुचि पैदा हो सके। अभी स्कूलों में व्यवसायिक शिक्षा की पढ़ाई नौवीं क्लास से दी जाती है।

    योजना के तहत केंद्रीय विद्यालयों में इसकी पढ़ाई इसी सत्र से शुरू की जा सकती है। हालांकि इसको लेकर अभी एनसीईआरटी और मंत्रलय के बीच अंतिम दौर की चर्चा होनी बाकी है। योजना के तहत व्यवसायिक कोर्स को छठवीं से लागू करने के पीछे जो तर्क है कि नौवीं तक आते-आते ज्यादातर बच्चे अपनी पढ़ाई और आगे के क्षेत्र को लेकर मानसिक रूप से तैयार हो चुके होते हैं। बाद में वह उसी दिशा में आगे बढ़ जाते हैं। 

    इसके चलते व्यवसायिक शिक्षा का उन पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ पाता है। सूत्रों की मानें तो एनसीईआरटी ने इन पहलुओं को देखते हुए बच्चों को अब छठवीं से ही इसकी पढ़ाई कराने की योजना बनाई है। योजना के तहत बच्चों को इस दौरान सिर्फ इस विषय की प्रारंभिक जानकारी दी जाएगी। ताकि उनके व्यवसायिक क्षेत्र में बढ़ने का रुझान पैदा हो सके। एनसीईआरटी इसके तहत छठवीं से आठवीं तक के लिए एक नया पाठ्यक्रम डिजाइन करने में जुटा है। गौरतलब है कि सरकार का फोकस इन दिनों युवाओं को पढ़ाई के बाद स्टार्टअप जैसे कारोबार से जोड़ने को लेकर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई बार युवाओं को कह चुके हैं कि वह नौकरी करने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनें।