प्राइमरी का मास्टर : मास्साब को नहीं भा रहा 'इंग्लिश मीडियम', चेतावनी के बावजूद राजधानी के स्कूलों में शिक्षकों की 40 फीसदी सीटें खाली

बेसिक शिक्षा परिषद की एक अप्रैल से 45 सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी मीडियम की पढ़ाई कराने की मुहिम मुश्किल में दिख रही है। तीन बार चेतावनी के बावजूद राजधानी के इन स्कूलों में शिक्षकों की 40 फीसदी सीटें खाली पड़ी हैं। परिषद ने 153 शिक्षकों को चयनित कर लिया है जबकि 225 की जरूरत है।

विभाग ने चार स्कूलों के नाम हटाते हुए कहा है कि इन स्कूलों के शिक्षकों को कई बार रिमाइंडर भेजने पर भी यहां के शिक्षकों ने पढ़ाने की इच्छा नहीं जताई है। ऐसे में सरकार की ओर से अपने बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में इंग्लिश मीडियम की पढ़ाई कराना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। बेसिक शिक्षा परिषद ने 20 से 28 फरवरी तक शिक्षकों के आवेदन मांगे थे।

इस तरह होनी है पढ़ाई: सरकारी नीति के तहत कक्षा एक से तीन तक की पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम के तर्ज से होनी है। वहीं, कक्षा चार से पांच तक हिंदी मीडियम से पढ़ाई प्रस्तावित है। इस योजना के तहत राजधानी में नौ ब्लॉक में कुल 45 स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम के तहत शिक्षा दी जानी है।

परिषद के पास ब्योरा नहीं: जानकारों की मानें तो विभाग को शिक्षक इसलिए नहीं मिल पा रहे हैं क्योंकि यहां किस ब्लॉक में कौन-कौन से पांच प्राइमरी स्कूल अंग्रेजी माध्यम के होंगे इसकी कोई सूची नहीं है।

बीएसए प्रवीणमणि त्रिपाठी ने कहा कि मानक के तहत ही नियुक्ति दी जाएगी। शिक्षकों के आवेदन आ रहे हैं। जल्द ही सभी 45 स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम के तहत शिक्षकों की तैनाती हो जाएगी।

 
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