मूल कॉपियां लेगी सीबीआइ: लाखों पन्ने फोटो स्टेट होने में लगेगा लंबा वक्त, प्रभावित होगी अन्य परीक्षा



इलाहाबाद : उप्र लोकसेवा आयोग से भर्तियों के कंप्यूटर डाटा लेने के बाद सीबीआइ ने यूपीपीसीएस (मुख्य) परीक्षा 2015 की मूल कॉपियां कब्जे में लेने की कार्यवाही शुरू कर दी है। कापियां सीबीआइ को सौंपने में आयोग की मशीनरी को चौबीसों घंटे काम करना पड़ रहा है। रिकार्ड अपने पास भी सुरक्षित रखने के लिए सभी कॉपियों की फोटो स्टेट कराने में अन्य परीक्षाओं संबंधित कार्य पिछड़ रहे हैं, क्योंकि जिन कॉपियों को फोटो स्टेट कराया जा रहा है उनके पन्नों की संख्या लाखों में हैं। 1सपा शासन के पांच साल में आयोग से हुई सभी भर्तियों की जांच के लिए सीबीआइ ने पीसीएस 2015, आरओ-एआरओ 2013 और पीसीएस जे 2015 को प्राथमिकता पर रखा है। पीसीएस की इससे पहले भी 2011 से 2014 तक की भर्तियों की जांच होनी है। फिलहाल 31 जनवरी 2018 से फरवरी मध्य तक सीबीआइ ने परीक्षा और गोपन विभाग के कंप्यूटरों से डाटा स्कैन कर लिए थे, जिनका परीक्षण विशेषज्ञ कर रहे हैं। वहीं इसके बाद सीबीआइ ने परीक्षा की सभी मूल कॉपियां पिछले दिनों आयोग से मांग ली हैं। सूत्र बताते हैं कि आयोग ने पूर्व में सीबीआइ को कोई अभिलेख मांगने पर जिस तरह से बेरुखा रवैया अपनाया था और विरोध भी उजागर हुआ था, लखनऊ में उच्चाधिकारियों से सीबीआइ एसपी राजीव रंजन की मुलाकात के बाद उस व्यवहार में तब्दीली आ गई है। सीबीआइ की टीम इन दिनों आयोग में अपना काम तेजी से कर रही है और आयोग से जांच में आवश्यक दस्तावेज व कंप्यूटर डाटा भी लिए जा रहे हैं। सीबीआइ के मांगने पर आयोग ने पीसीएस परीक्षा 2015 के सभी अभ्यर्थियों की मूल कापियां देने के लिए उनकी फोटो स्टेट कराना शुरू कर दिया है, ताकि परीक्षा के रिकार्ड अपने पास भी सुरक्षित रखा जा सके। ऐसे में फिलहाल चार बड़ी मशीनों से कॉपियों की प्रतियां निकलवाई जा रही हैं। आयोग का कहना है कि प्रत्येक अभ्यर्थी की मूल कापी में कम से कम 86 पन्ने होते हैं और कॉपियों की संख्या भी लाखों में हैं। उन सभी के फोटो स्टेट कराने में चौबीसों घंटे मशीनें चल रही हैं। सभी कॉपियोें की फोटो स्टेट कराने में 10 मशीनों की और आवश्यकता है।