आंबेडकर महासभा में सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया एलान : पूर्वदशम व दशमोत्तर छात्रवृत्ति के लिए आय सीमा दो लाख से बढ़ाकर होगी ढाई लाख, कक्षा नौ और 10 के दलित छात्रों की छात्रवृत्ति बढ़ेगी 750 रुपये

आंबेडकर महासभा में सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया एलान

बाबा भीमराव आंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय को छात्रवास व स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की सौगात

जासं, लखनऊ : बाबा साहब को स्कूली जीवन में जिस आर्थिक विषमता का सामना करना पड़ा था और जीवन र्पयत जिन सामाजिक मूल्यों के लिए वे लड़ते रहे, लेकिन देश के संविधान के शिल्पी के रूप में जब उन्हें एक ऐतिहासिक अवसर मिला तो उन्होंने इस विषमता को राष्ट्र के सम्मान व एकता के आड़े नहीं आने दिया। यही बाबा साहब आंबेडकर की सबसे बड़ी खूबी थी। यह कहना था मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का। वह बाबा साहब की 127वीं जयंती के अवसर पर बोल रहे थे। शनिवार को बाबा भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा जब भी देश में स्वतंत्रता, समता न्याय व बंधुत्व की बात होगी, तब-तब बाबा साहब का स्मरण किया जाएगा। वहीं जयंती के मौके पर बीबीएयू के कुलपति प्रो. आरसी सोबती ने मुख्यमंत्री से विवि में 500 छात्रओं के लिए हॉस्टल सुविधा व स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की मांग की। कुलपति ने कहा कि विवि में 50 प्रतिशत से दलित स्टूडेंट्स हैं। इनमें 80 प्रतिशत बालिकाएं हैं। ऐसे में विवि में छात्रओं के आवास की सुविधा अत्यंत आवश्यक है। इस पर मुख्यमंत्री ने सरल भाव से स्वीकृत प्रदान की। उन्होंने कुलपति से प्रस्ताव भेजने के लिए कहा। सीएम ने छात्रवास का नाम सावित्री बाई फूले छात्रवास रखे जाने की इच्छा जाहिर की। इस दौरान ग्राम्य विकास मंत्री महेंद्र प्रताप सिंह, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री बलदेव सिंह समेत तमाम लोग मौजूद रहे।

जोश और जुनून के साथ आस्था का सैलाब1कहीं ढोल नगाड़ों पर झूमते युवाओं का हुजूम नजर आ रहा था तो कहीं हाथ में माला लेकर प्रदेश भर से परिवार के साथ आने वाले अनुयायियों का समूह। हर कोई बाबा साहब भीमराव आंबेडकर की आदमकद प्रतिमा के दर्शन कर अपनी पुष्पांजलि अर्पित करने के लिए आंबेडकर स्मारक पहुंचने को आतुर नजर आया। एक तरफ जहां आंबेडकर स्मारक के भीतर आस्था का सैलाब था जो कि थमने का नाम नहीं ले रहा था, वहीं दूसरी ओर स्मारक के बाहर कई संगठनों की ओर से की गई भंडारे की व्यवस्था थी जो उनकी सहभागिता को और मजबूत बना रही थी। मेले जैसा माहौल आंबेडकर स्मारक के बाहर हर तरफ दिखायी दे रहा था। अब अनुयायियों की संख्या अपार थी तो जिला प्रशासन ने भी कोई कसर नहीं छोड़ रखी थी। उनके लिए पीने के पानी से लेकर बीमार पड़ने पर दवा तक का इंतजाम किया गया। वैसे तो अंबेडकर स्मारक पर सैर करने के लिए रोजाना सैकड़ों लोग आते हैं, लेकिन शनिवार को जब उनकी 127वीं जयंती थी तो यहां आने वाले लोगों की चहलकदमी से पूरा इलाका सुबह से लेकर देर रात तक गुलजार हो गया। सहारनपुर से लेकर गोरखपुर तक और सोनभद्र से लेकर गाजियाबाद तक लोग ट्रेनों, बसों और अपने साधनों से सुबह चार बजे से ही लखनऊ पहुंचने लगे। लखनऊ पहुंचते ही बाबा साहब के अनुयायी सीधे गोमतीनगर पहुंचे। यहां इन अनुयायियों के स्वागत के लिए रेलवे, पावर ग्रिड और कई बैंकों व अन्य सरकारी संस्थानों से जुड़े संगठनों के स्टाल पर मनोरंजन और बाबा साहेब से जुड़ी यादों को प्रस्तुत किया गया


 
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