उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग पीसीएस 2015 भर्ती घोटाला : दागी शिक्षकों ने जांची पीसीएस परीक्षा की कापियां! सीबीआइ अफसरों के हाथ लगे अहम सुबूत - Primary Ka Master || UPTET, Basic Shiksha News, TET, UPTET News
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    Monday, 4 June 2018

    उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग पीसीएस 2015 भर्ती घोटाला : दागी शिक्षकों ने जांची पीसीएस परीक्षा की कापियां! सीबीआइ अफसरों के हाथ लगे अहम सुबूत

    उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग पीसीएस 2015 भर्ती घोटाला : दागी शिक्षकों ने जांची पीसीएस परीक्षा की कापियां! सीबीआइ अफसरों के हाथ लगे अहम सुबूत

    इलाहाबाद : पीसीएस परीक्षा 2015 समेत उप्र लोक सेवा आयोग से हुई अन्य परीक्षाओं में अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं कई दागी शिक्षकों ने जांची। भर्तियों की जांच कर रहे सीबीआइ अफसरों के हाथ जो सुबूत लगे उसे मानें तो जिन दागी शिक्षकों को अपने विश्वविद्यालय में भी प्रश्न पत्र बनाने और कापियां जांचने को नहीं दिया गया उप्र लोक सेवा आयोग ने उन्हें विशेषज्ञ परीक्षक के तौर पर रखा। इन दागी शिक्षकों को बतौर परीक्षक बनाने के पीछे आयोग में किसकी भूमिका है सीबीआइ अफसर उसकी तलाश में जुट गए हैं।1आयोग से पांच साल के दौरान हुई सभी भर्तियों की जांच में सीबीआइ को केवल एक ही परीक्षा यानी पीसीएस 2015 में ही भारी अनियमितता मिल रही है। अभ्यर्थियों के चयन में गड़बड़ी के अब तक कई सबूत जुटा चुके जांच अधिकारियों को पिछले दिनों एक और बड़ी जानकारी आयोग कर्मियों से ही मिली। पता चला है कि पूर्व अध्यक्ष डॉ. अनिल यादव के कार्यकाल में सामान्य अध्ययन, सामान्य हंिदूी तथा निबंध को मिलाकर कुल 57 विषयों में से लगभग 34 विषय ऐसे हैं जिनमें आयोग ने बार-बार एक ही विषय विशेषज्ञ को बुलाया। इनमें कई शिक्षक ऐसे थे जिन्हें उनके विश्वविद्यालयों में भी न तो प्रश्न पत्र बनाने दिया गया न ही उत्तर पुस्तिकाओं को जांचने के काम में लगाया गया। सीबीआइ को पता चला कि ऐसे दागी शिक्षकों से पीसीएस परीक्षा 2015 व अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र बनवाने के लिए एक सदस्य ने आपत्ति की थी। जिसे आयोग के पूर्व अध्यक्ष डा. अनिल यादव समेत अन्य सदस्यों ने दरकिनार किया। सीबीआइ को यह भी जानकारी मिली है कि सीधी भर्ती से होने वाली परीक्षाओं में अवर अभियंता, खाद्य सुरक्षा अधिकारी व प्रवक्ता के स्क्रीनिंग टेस्ट में भी वही विशेषज्ञ रखे गए जो पीसीएस परीक्षा के लिए थे।
    सीबीआइ अधिकारियों ने अपने सूत्रों से यह पता लगाना शुरू कर दिया है कि दागी शिक्षकों को बतौर परीक्षक रखने के पीछे आखिर कौन से कारण थे और इसमें किसकी भूमिका अधिक रही। ऐसे पूर्व अधिकारियों व दागी शिक्षकों से भी पूछताछ जल्द हो सकती है।