Uttar Pradesh Public Service Commission - UPPSC : यूपीपीएससी में डिबार शिक्षक जांचते रहे कॉपियां, सीबीआइ की जांच में खुला राज, जांच टीम तथ्य जुटाने में जुटी - primary ka master | basic shiksha news | updatemarts | uptet news | basic shiksha parishad
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    Sunday, 10 June 2018

    Uttar Pradesh Public Service Commission - UPPSC : यूपीपीएससी में डिबार शिक्षक जांचते रहे कॉपियां, सीबीआइ की जांच में खुला राज, जांच टीम तथ्य जुटाने में जुटी

    Uttar Pradesh Public Service Commission - UPPSC : यूपीपीएससी में डिबार शिक्षक जांचते रहे कॉपियां, सीबीआइ की जांच में खुला राज, जांच टीम तथ्य जुटाने में जुटी

    उप्र लोक सेवा आयोग ने सिर्फ परीक्षा केंद्रों के चयन व साक्षात्कार में ही चहेतों को लाभ नहीं पहुंचाया, बल्कि अन्य माध्यम से भी पूरी मदद की गई। सीबीआइ टीम के हाथ ऐसे रिकॉर्ड लगे हैं, जिसमें डिबार शिक्षकों से कॉपियां चेक करवाई गईं। आयोग ने परीक्षकों को बदलने में भी दिलचस्पी नहीं दिखाई, कई चुनिंदा चेहरे आयोग के परीक्षा विभाग से वर्षो तक जुड़े रहे।
    पांच वर्षों के दौरान आयोग के किये धरे की जांच कर रही सीबीआइ टीम ने पीसीएस 2015 आदि की उत्तर पुस्तिकाएं हासिल कीं। उनकी छानबीन में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिस पर किसी की निगाह नहीं गई। कॉपियों का लेखन, प्रश्नों का क्रमांक मिलाने के साथ ही टीम ने यह भी परखा कि उनका मूल्यांकन किसने किया है। मूल्यांकन के परीक्षक आखिर कब से जुड़े रहे। सामने आया कि कई ऐसे शिक्षकों ने कॉपियां जांची हैं, जिन्हें शिकायत मिलने पर डिबार किया गया। असल में इन परीक्षकों ने अपने शिष्यों को प्रश्नपत्र आदि मुहैया कराया था। यही नहीं एक ही विषय के एक ही शिक्षक लगातार आयोग में आते रहे। इनमें डिफेंस व सोशल वर्क आदि विषयों में परीक्षकों को बदला नहीं गया। आयोग ने कॉपियों के मूल्यांकन में स्थानीय व आसपास के शिक्षकों को ही वरीयता दी। दूसरे प्रांत से परीक्षकों को बुलाया नहीं गया।
    आयोग ने प्रश्नपत्र तैयार करने व उसकी उत्तरकुंजी बनवाने में भी चहेते परीक्षकों को ही वरीयता दी। नियम यह है कि जो शिक्षक प्रश्न बैंक तैयार करे वह उत्तरकुंजी नहीं बनाएगा, बल्कि दूसरा शिक्षक आंसर शीट तैयार करेगा लेकिन, यह दोनों कार्य एक ही से लिए जाते रहे।
    दरअसल यह व्यवस्था प्रश्नपत्र की गोपनीयता के लिहाज से भी अहम है। किसी भी परीक्षा के कई प्रश्नपत्र तैयार कराए जाते हैं, उनमें से अंतिम समय में उन्हीं से कई सेट पेपर बनवाए जाते हैं। प्रश्न बैंक बनाने व उत्तरकुंजी तैयार करने वाले अलग-अलग शिक्षक होने से यह अनुमान नहीं लग पाता कि आखिर कौन से सवाल परीक्षा में पूछे जा रहे हैं। इसीलिए आयोग में कुछ समय के लिए यह व्यवस्था बदली गई थी, जो बहुत दिनों तक नहीं चल सकी। सीबीआइ टीम इस मामले में और तथ्य जुटाने में जुटी है। तैयारी है कि अन्य वर्षो की कॉपियां देखने पर उसमें और मामले खुल सकते हैं।