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    Sunday, 3 February 2019

    सुप्रीम कोर्ट से शिक्षामित्रों को मिल सकती है बड़ी राहत,भोला शुक्ल की रिट से हो सकता है फायदा,

    सुप्रीम कोर्ट से शिक्षामित्रों को मिल सकती है बड़ी राहत,भोला शुक्ल की रिट से हो सकता है फायदा,


    शिक्षामित्र की स्थिति समायोजन से पूर्व पद के निर्धारण हेतु भोला शुक्ल जी के रिट के अनुसार जो सुप्रीम कोर्ट मे दिनॉक ०४-०१-२०१९ को दाखिल की गयी और दिनॉक १२-०१-२०१९ को डायरी नम्बर मिल गयी है और रिट निम्न बिन्दु पर तैयार की गयी हैै :-

    १- शिक्षामित्र की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा विभिन्न शासनादेश व कार्यक्रमो द्वारा (बेसिक शिक्षा परिषद, डीपीईपी व सर्व शिक्षा अभियान) इन्टर योग्यताधारी युवाओ को ११ माह के लिये छात्र शिक्षक अनुपात पूरा करने के लिये किया गया।

    २- वर्ष २००७ तक सभी शिक्षामित्रो का नवीनीकऱण कराना अनिवार्य था और सन् २००७ के शासनादेश के तहत नवीनीकरण की प्रक्रिया मे बदलाव करते हुये नवीनीकरण से सरलीकरण किया गया जिस पर कोई आरोप लगता केवल उसे ही नवीनीकरण करवाना था और जिस पर कोई आरोप नही लगता वह नियमित शिक्षक की तरह स्व़य स्कूल के शिक्षण कार्य मे शामिल होकर कार्य करने लगता।

    ३- जब आरटीईएक्ट २००९ का गठन हुआ तो उसमे उल्लेख हुये कि कोई भी अप्रशिक्षित अध्यापक आरटीईएक्ट लागू होने के बाद विद्यालय मे शिक्षण कार्य करने के लिये योग्य नही माने जायेंगे इसलिये जो अप्रशिक्षित लोग एनसीटीई के विनिमय २००१ के तहत योग्यता पूरी करते हो उन्हे आरटीईएक्ट की धारा २३(१) व २३(२) के तहत योग्यता पूरी करने के लिये २०१५ तक समय एनसीटीई ने सभी राज्यो को प्रदान किया ।

    ४- राज्य सरकार द्वारा बिन्दु संख्या ३ के अनुसार ही आरटीईएक्ट लागू होने होने तक जो लोग एनसीटीई के विनिमय २००१ के तहत योग्यता पूरी करते थे उनको अन्ट्रेड टीचर (अप्रशिक्षित स्नातक शिक्षामित्र) मानते हुये एनसीटीई के पास पहले २०१० मे १४०००० स्नातक शिक्षामित्र (रेगुलर व प्राईवेट) का प्रपोजल बनाकर भेजा जिस पर एनसीटीई ने अनुमति नही दिया। (राज्य सरकार व एनसीटीई २०१० के पहले १२४००० स्नातक शिक्षामित्र सहित सबको संविदा कर्मी मानती थी)

    ५- राज्य सरकार द्वारा पुन: रेगुलर स्नातक शिक्षामित्र को १४००० ० के प्रपोजल से हटाकर केवल १२४००० स्नातक शिक्षामित्र को अन्ट्रेड टीचर मानते हुये ०३-०१-२०११ मे प्रपोजल व पत्र भेजा प्रशिक्षण के लिये जिसे एनसीटीई ने सही माना।

    ६- एनसीटीई ने राज्य सरकार के ०३-०१-२०११ के पत्र व प्रपोजल के आधार पर ही १२४००० स्नातक शिक्षामित्र को अन्ट्रेड टीचर (अप्रशिक्षित स्नातक शिक्षामित्र) मानते हुये १४-०१-२०११ को आरटीईएक्ट २००९ के अनुसार २०१५ तक प्रशिक्षित होने के लिये अनुमति पत्र जारी किया ।

    ७- प्रथम बैच का प्रशिक्षण फरवरी २०१४ मे व सेकण्ड बैच का प्रशिक्षण दिसम्बर २०१४ मे पूरा हुआ ।(प्रमाण पत्र के अनुसार)

    ८- सभी १२४००० अप्रशिक्षित स्नातक शिक्षामित्र का प्रशिक्षण पूरा होने के बाद राज्य सरकार द्वारा सबको समायोजन करके सहयाक अध्यापक बना दिया लेकिन एनसीटीई ने १२४००० को अध्यापक नही माना तथा इनको नियमित शिक्षक की श्रेणी मे न रखकर अपग्रेड पैराटीचर की श्रेणी मे रखा व सारी सुविधा अध्यापक के समान माना। (पैब रिपोर्ट २०१६-१७ व २०१७-१८ के अनुसार)

    ९- हाईकोर्ट इलाहाबाद से १२ सितम्बर २०१५ को समायोजन निरस्त होने के बाद भी एनसीटीई ने १२४ के पक्ष मे टेट से छूट का पत्र जारी किया लेकिन कोर्ट मे १२४ प्रशिक्षित स्नातक शिक्षामित्र पार्टी न होने से कोर्ट ने किसी को कोई राहत नही दी।

    १०-जब समायोजन हुआ उस समय १२४००० की स्थिति अन्ट्रेड टीचर (अप्रशिक्षित स्नातक शिक्षामित्र) से ट्रेन्ड टीचर (प्रशिक्षित स्नातक शिक्षामित्र) थी जिसे एनसीटीई ने उसी विद्यालय मे अपग्रेड पैराटीचर माना व १२ माह के लिये नियमित शिक्षक के समान सुविधा दी।

    प्रथम बैच का प्रशिक्षण ५८००० व सेकण्ड बैच का प्रशिक्षण ७७००० का पूरा होने बाद लगभग १३५००० का समायोजन हुआ लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट से समायोजन निरस्त होने पर एनसीटीई ने केवल १२२००० को अपग्रेड पैराटीचर माना व १२००० (सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर छोड़ते हुये) को प्रशिक्षण पूरा होकर समायोजन होने के बावजूद अपग्रेड पैराटीचर न मानते संविदा कर्मी माना व १४००० शिक्षामित्र जो थर्ड बैच मे प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे थे उनके समकक्ष मानते हुये ३५०० मानदेय जारी किया ।
    इस समय एनसीटीई ने शिक्षामित्र की तीन कटेगरी निर्धारित किया :-
    १- अपग्रेड पैराटीचर (१२२०००)
    २- प्रशिक्षण पूरा होने बाद भी संविदा कर्मी (१२०००)
    ३- प्रशिक्षणरत संविदा कर्मी(१४०००)
    ११- एनसीटीई व एमएचआरडी ने वर्ष २०१७-१८ मे शिक्षामित्र को केवल दो कटेगरी मे रखा
    १- पहला संविदा कर्मी ११ माह २६००(१२००+१४०००)
    २- अपग्रेड पैराटीचर १२ माह (१२१०६३)
    १३-सुप्रीम कोर्ट ने २५-०७-२०१७ को अपने आर्डर मे लिखा है कि शिक्षामित्रो को समायोजन से पूर्व की स्थिति मे रखने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है । (अन्तिम पेज बिन्दु २६) लेकिन राज्य सरकार ने १२४००० प्रशिक्षित स्नातक शिक्षामित्र को समायोजन से पूर्व की स्थिति (अप्रशिक्षित स्नातक शिक्षामित्र से प्रशिक्षित स्नातक शिक्षामित्र) प्रशिक्षित स्नातक शिक्षामित्र (अपग्रेड पैराटीचर) पर न रख कर २० सितम्बर २०१७ शासनादेश के तहत सभी को एक कटेगरी मे ऱखते हुये १०००० मानदेय पर ११ माह के लिये शिक्षामित्र पद पर रख दिया जो सुप्रीम कोर्ट के आर्डर की भी अवमानना कर रही है । समायोजन से पूर्व की स्थिति का गलत व्याख्या करके।
    हमारे द्वारा जनसुवाई मे इस प्रकरण पर आवेदन दिया गया था तब सचिव/मुख्य सचिव/निदेशक बेसिक द्वारा पहले लिखा गया कि २० सितम्बर २०१७ के शासनादेश के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के आर्डर २५-०७-२०१७ के अनुपालन मे नीति जारी कर दी गयी है असके बाद हमने पुन: उपरोक्त लोगो के नाम दूसरा जनसुनवाई मे आवेदन किया और सभी बिन्दु लिखे तो उसमे लिखा गया कि आपका प्रकरण नीतिगत है इस प्रकरण पर सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद इलाहाबाद से सम्भव नही है। इस प्रकरण पर शासन स्तर से निर्णय लिया जा सकता है ।