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    Monday, 11 February 2019

    अनायास नहीं पैदा हुआ अटेवा,old pension scheme agenda reform atewa, nmops, all teachers and employee welfare association

    अनायास नहीं पैदा हुआ अटेवा,old pension scheme agenda reform atewa, nmops, all teachers and employee welfare association


        आज लाखों पेंशन विहीन हैं जो भ्रम में जी रहे हैं ,आइये आज आपको अटेवा के अभ्युदय की कहानी बताते हैं।

           सन् 2013 का उत्तरार्ध ऐसा समय था जब लखनऊ का एक साधारण शिक्षक जिसको न तो कोई जानता था न कोई पहचानता था, चूंकि उसकी ज्वाइनिंग 15 अप्रैल 2005 को है अत: वह अपने बुढापे के लाठी पुरानी पेंशन के लिए चिंतित था । साल में एक बार संघों के नेता चन्दा लेने आते थे तो उनसे इस विषय पर सवाल भी करता था किन्तु संगठन वाले गोल-मोल जबाब दे देते थे।
    अनायास नहीं पैदा हुआ अटेवा,old pension scheme agenda reform atewa, nmops, all teachers and employee welfare association

         यह साधारण शिक्षक चूंकि लखनऊ में रहता था अत: पुरानी पेंशन पर सोचना शुरू किया , उसके सामने अहम प्रशन यही था कि इतना अहम मुद्दा होने के बाद भी कोई बडा नेता *पहल क्यों नहीं* कर रहा है बहुत खोज बीन के बाद पता चला कि यह *पुरानी पेंशन का मुद्दा हर शिक्षक, कर्मचारी,अधिकारी से जुडा हुआ है अत: किसी एक विभाग का संघ इसे हल नहीं करा सकता ।*

          इसके लिए जरूरी है की सभी संघ मिलकर एक साझा मंच का निर्माण करें ,अब इस साधारण शिक्षक ने एक अभियान शुरु किया और वो अभियान था विभिन्न संघों के जाने माने नेताओं से मुलाकात करना और उन्हें इस मुद्दे के लिए साझा मंच बनाने के लिए प्रार्थना करना।

           *किन्तु दुर्भाग्य है कि आज पुरानी पेंशन के नाम पर अलग-अलग मंच गठित करके दहाड मारने  वाले नेताओं ने उस साधारण शिक्षक के बात को तब्बजो नहीं दी।*

         तब्बजो इस लिए नहीं मिली क्योंकि सन् 2015  में उस शिक्षक की पहचान नहीं बन पायी थी ,उसको हर संघ के दरवाजे से लौटाया गया ,हर नेता द्वारा टालमटोलू वाक्य सुनाया गया । जानते हैं आप वह साधारण शिक्षक कौन था , वह था *विजय कुमार बन्धु*  ।

            जब प्रदेश का कोई कर्मचारी नेता( वर्तमान के सभी नामचीन नेता) साझा मंच बनाने को आगे नहीं आया तब विजय कुमार बन्धु ने *अटेवा* की नींव रखी । अपने जान पहचान वाले लोगों से इस मुद्दे पर बात करना और उनको इस मुहिम से जोडना शुरू किया । *इस मुहिम में बन्धु जी ने सोसल मीडिया का भी भरपूर उपयोग किया*  और  धीरे-धीरे यह काँरवा बढने लगा।

         मुझे अच्छे से याद है जनवरी 2016  से पूर्व यह पुरानी पेंशन का मुद्दा कुछ संगठनों के माँग पत्र में था तो कुछ के माँग पत्र में भी नहीं था । जिनके माँग पत्र में था भी तो 23- 24-25 नम्बर पर। यह सही है कि कुछ संगठन इस मुद्दे पर एक-आध धरना कर चुके थे किन्तु आज के जैसे केवल एक माँग के लिए नहीं बल्कि कई माँगों के साथ। किन्तु यह मुद्दा जनसामान्य से दूर था । खुद मैं अपने स्टाफ के साथियों के साथ NPS कटौती शुरू करवाने की चर्चा किया करता था क्यों कि कई वर्ष नौकरी के बीत चुके थे और हमारे पास न तो नई पेंशन थी न ही पुरानी पेंशन ।

           *पेंशन के मुद्दे को नौजवानों ने हाथों - हाथ लिया क्योंकि 12 वर्ष में इस मुद्देको दफन कर दिया गया था, लोगों को समझाया गया था कि अब पुरानी पेंशन नहीं मिल सकती,किन्तु ATEWA और विजय कुमार बन्धु की बात पेंशन विहीनों को प्रमाणिक लगी।  इसलिए हर जनपद में 5-10 लोग ऐसे मिले जिन्होंने पुरानी पेंशन मुहिम के लिए दिन-रात एक कर दिया। प्रदेश का  किसी भी दल का शायद ही कोई नेता बचा हो जिसको अटेवा के जांबाज साथियों ने पुरानी पेंशन बहाली का ज्ञापन न दिया हो ,प्रदेश में पहली बार काला दिवस(1-4-2016), मजदूर दिवस(1-5-2016)पर विधान सभा घेराव, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को लाखों रजिस्टर्ड डाक भेजना(मई-जून 2016), मोटरसायकिल रैली(20-7-2016), पाँच दिवसीय भूख हडताल(21 से 25 अगस्त 2016) । युवाओं ने वह सब कर दिखलाया जो कभी वो भाषणों में सुना करते थे, बन्धुजी बिना थके हारे इस जिले से उस जिले जो कठिन परिश्रम किया वह प्रदेश के युवा पेंशन विहिन अच्छी तरह जानते हैं । अटेवा ने इतने सभा व सम्मेलनों का आयोजन उत्तर प्रदेश में किया है कि उसको यहाँ लिख पाना सम्भव नहीं है । हजारों साथियों के कठिन प्रयास से और बन्धु जी के कुशल निर्देशन से आज पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा आज न केवल प्रदेश में बल्कि पूरे देश में गूंज रहा है ।*

         *मैं प्रदेश के तमाम संघों के रहनुमाओं से पूछना चाहता हूँ कि  यदि उसी समय आपने यह कदम उठा लिया होता जो आज आपके द्वारा किया जा रहा है तो अटेवा का जन्म ही नहीं होता । आपकी बुद्धि देर से जागी किन्तु दुरूस्त नहीं जागी । यदि आप देर से जागे तब आपको अपने छोटे भाइयों का हौसला बढाना था ,उनका सहयोग करना था किन्तु आपने तो उनको ही दुश्मन मान लिया । जबकि अटेवा से जुडे किसी व्यक्ति के मन में ऐसा नहीं है कि हम आपको आपके सत्ता से बेदखल करें , फिर ये डर कैसा मुझे और लाखों पेंशन विहीनों को समझ में नहीं आता।*
           अटेवा ने पेंशन विहीनों को इतना जागरूक कर दिया है कि अब किसी का चाल चलने वाला नहीं है पेंशन विहीन कुछ समय के लिए भ्रमित जरूर हो सकता है किन्तु अन्धभक्त नहीं बन सकता । हमारे जैसे लाखों पेंशन विहीनों का एक ही सपना है कि *पुरानी पेंशन जल्द बहाल हो* ।
         मैं धन्यवाद दूंगा विजय कुमार बन्धु को कि तमाम झंझावातों के बाद भी वे 24 घण्टे इस मुद्दे के समाधान में लगे रहते हैं, आज देश के लाखों पेंशन विहीनों का विश्वास उनके साथ अनायास नहीं है । एक तरफ जहाँ बडे बडे नेता पेंशन आन्दोलन को दफन करने में लगें हैं वहीं विजय कुमार बन्धु लागातार इस मुद्दे को धार देने में लगें हैं ।
         *उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यसचिव, पूर्व वित्त सचिव, पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव, वर्तमान गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह, समेत कई प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के साथ पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे पर बात करने वाला कोई है तो वो विजय कुमार बन्धु हैं । मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि इस मुद्दे को पेंशन विहीन विजय कुमार बन्धु जितनी तन्मयता से लड सकते हैं उतनी तन्मयता से देश का कोई पेंशन धारी नेता नहीं लड सकता।