अतीत में अपारदर्शी चयन प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में अयोग्य शिक्षकों की भर्ती की गई। - प्राइमरी का मास्टर - UPTET | Primary Ka Master | Basic Shiksha News | Shiksha Mitra News
  • primary ka master

    LATEST PRIMARY KA MASTER - BASIC SHIKSHA NEWS TODAY


    Friday, 10 May 2019

    अतीत में अपारदर्शी चयन प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में अयोग्य शिक्षकों की भर्ती की गई।

    अतीत में अपारदर्शी चयन प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में अयोग्य शिक्षकों की भर्ती की गई।


    अतीत में अपारदर्शी चयन प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में अयोग्य शिक्षकों की भर्ती की गई

    सर्वोच्च न्यायालय के इस सवाल का जवाब देना प्रदेश शासन के लिए आसान नहीं है कि 68,500 शिक्षकों की भर्ती में हुए कथित घोटाले की सीबीआइ जांच क्यों नहीं करवाई जाए? कई अभ्यर्थी यह मांग लेकर कोर्ट पहुंचे हैं यद्यपि राज्य सरकार इस पर सहमत नहीं है। इस भर्ती में जिस दर्जे की गड़बड़ियों के संकेत मिल रहे हैं, उसे देखते हुए इसकी किसी तटस्थ एजेंसी से जांच कराने में कोई हर्ज नहीं दिखता यद्यपि राज्य सरकार का पक्ष सर्वोच्च न्यायालय में उसके जवाब से ही स्पष्ट हो सकेगा। इस बात के प्रमाण मिल चुके हैं कि इस भर्ती में ऐसे अभ्यर्थियों का चयन कर लिया गया जाो लिखित परीक्षा में फेल हो गए थे जबकि परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थी चयन से वंचित कर दिए गए। इतना ही नहीं, जब अभ्यर्थियों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाएं दिखाने का आग्रह किया तो उन्हें किसी अन्य अभ्यर्थी की उत्तर पुस्तिका दिखाई गई। ऐसी अनगिनत शिकायतों के चलते यह बड़ी भर्ती परीक्षा संदेह के घेरे में खड़ी है। स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि इस भर्ती में व्यापक पैमाने पर संगठित ढंग से गड़बड़ी की गई है। योगी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ पारदर्शी नीति के लिए सराही जाती है, इसलिए उसे इस भर्ती घोटाले की सीबीआइ जांच का विरोध नहीं करना चाहिए। चयन परीक्षाओं में धांधली के त्वरित और दूरगामी कुपरिणाम होते हैं। भ्रष्टाचार के कारण जिन प्रतिभाओं का चयन नहीं हो पाता, वे कुंठा की शिकार हो जाती हैं जबकि अयोग्य व्यक्तियों के चयन से शासन की कार्यसंस्कृति पर दूरगामी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था पहले ही अयोग्य शिक्षकों की समस्या से जूझ रही है। अतीत में अपारदर्शी चयन प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में अयोग्य शिक्षकों की भर्ती की गई। अब यदि ऐसे ही 68,500 और शिक्षक भर्ती हो गए तो यह समस्या नासूर बन जाएगी। राज्य सरकार को हर तरह के संकोच त्यागकर प्रदेश के व्यापक हित में इस घोटाले की नीर-क्षीर जांच करवानी चाहिए। यदि सीबीआइ जांच करवाने में कोई कठिनाई है तो हाईकोर्ट के किसी मौजूदा या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की कमेटी या आयोग गठित करके जांच करवाई जा सकती है।


    PRIMARY KA MANSTER WEELKY TOP NEWS

    PRIMARY KA MASTER MONTHLY TOP NEWS

    PRIMARY KA MASTER TOP NEWS

    PRIMARY KA MASTER NOTICE

    नोट:-इस वेबसाइट / ब्लॉग की सभी खबरें google search व social media से लीं गयीं हैं । हम पाठकों तक सटीक व विश्वसनीय सूचना/आदेश पहुँचाने की पूरी कोशिश करते हैं । पाठकों से विनम्रतापूर्वक अनुरोध है कि किसी भी ख़बर/आदेश का प्रयोग करने से पहले स्वयं उसकी वैधानिक पुष्टि अवश्य कर लें । इसमें वेबसाइट पब्लिशर की कोई जिम्मेदारी नहीं है । पाठक ख़बरों/आदेशों के प्रयोग हेतु खुद जिम्मेदार होगा ।