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    Friday, 10 May 2019

    टाइम मैग्जीन के कवर पर नरेंद्र मोदी, लेकिन बताया- भारत का डिवाइडर इन चीफ यानी भारत को बांटने वाला

    टाइम मैग्जीन के कवर पर नरेंद्र मोदी, लेकिन बताया- भारत का डिवाइडर इन चीफ यानी भारत को बांटने वाला

    अमेरिका की प्रतिष्ठित पत्रिका टाइम मैगजीन ने अपने एशिया एडिशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो कवर पेज पर छापी है। हालांकि, पत्रिका ने मोदी को भारत का 'divider in chief' बताया है।

    अमेरिका की प्रतिष्ठित टाइम मैग्जीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर को कवर फोटो के रूप में लिया है। हालांकि, इस बार विदेशी मीडिया में पीएम मोदी को लेकर फील गुड फैक्टर का अभाव दिखाई दे रहा है। पत्रिका ने पीएम की इस फोटो के साथ विवादित शीर्षक दिया है।
    टाइम मैग्जीन में पीएम की फोटो के साथ ही उन्हें ‘इंडिया का डिवाइडर इन चीफ’ है।’ लोकसभा चुनाव के बीच इस इस पत्रिका की तस्वीर और खबर को लेकर विवाद होने की आशंका है।  मैग्जीन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘इंडिया का डिवाइडर इन चीफ’ यानि भारत को बांटने वाला प्रमुख व्यक्ति बताया गया है।
    पीएम पर लिखे आर्टिकल में भाजपा के हिंदुत्व की राजनीति का हवाला दिया गया है। लेखक के अनुसार भाजपा की हिंदुत्व की राजनीति के कारण वोटरों के ध्रुवीकरण की बात कही गई है। आर्टिकल के शुरुआत में ही लिखा गया है कि महान लोकतंत्रों का पापुलिज्म की तरफ झुकाव, भारत इस दिशा में पहला लोकतंत्र होगा।

    कवर स्टोरी का शीर्षक है, ‘क्या दुनिया की सबसे बड़ा लोकतंत्र मोदी सरकार को फिर पांच साल के लिए भुगतेगा?’ स्टोरी के लेखक आतिश तासीर लोकतंत्रों में बढ़ते पॉपुलरिज्म की बात करते हैं। वे तुर्की, ब्राजील, ब्रिटेन और अमेरिका का भी हवाला देते हैं।
    लेख में कहा गया है, ‘पॉपुलिज्म ने बहुत से लोगों में शिकायत की भावना को भी आवाज दी है जिसे नजरअंदाज करना बहुत व्यापक रूप से दिखाई देता है।’ लेख में 2014 के चुनाव के बाद पीएम मोदी को लेकर आलोचनात्मक रुख दिखाई देता है। इसमें कहा गया है कि आजाद भारत की धर्मनिरपेक्षता, उदारवाद और स्वतंत्र प्रेस जैसी उपलब्धियां ऐसी प्रतीत होती हैं जैसे वे किसी षड्यंत्र का हिस्सा हों।
    लेखक साल 2002 के गुजरात दंगों के समय नरेंद्र मोदी की चुप्पी साधने का आरोप लगाता है। साथ ही उन्हें ‘भीड़ का दोस्त’ साबित करता है। लेख में गाय के मामले में भीड़ हिंसा को लेकर प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं। लेख में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के धर्मनिरपेक्षता के विचार और मोदी के शासनकाल में प्रचलित सामाजिक ‘तनाव’ की तुलना की गई है।

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