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    Tuesday, 11 June 2019

    बेसिक शिक्षा परिषद मुख्यालय पर भी खतरा, लखनऊ में कार्यालय के लिए खोजा जा रहा भवन

    बेसिक शिक्षा परिषद मुख्यालय पर भी खतरा, लखनऊ में कार्यालय के लिए खोजा जा रहा भवन

    बेसिक शिक्षा परिषद उप्र का मुख्यालय भी प्रयागराज से लखनऊ स्थानांतरित करने की तैयारी है। लखनऊ में इधर करीब एक माह से मुख्यालय के भवन खोजने की प्रक्रिया चल रही है। शासन के निर्देश पर परिषद सचिव ने इसका प्रस्ताव भी तैयार करके भेज दिया है। मुख्यालय स्थानांतरित करने की वजह समीक्षा बैठकों में अफसरों की अनिवार्य उपस्थिति और प्रकरणों पर त्वरित निर्णय कराया जाना है।

    41 वर्ष से प्रयागराज में संचालित : उप्र बेसिक शिक्षा परिषद का मुख्यालय 25 जुलाई 1972 को लखनऊ में ही स्थापित किया गया था। उस समय शिक्षा निदेशालय का मुख्यालय इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में होने के कारण कार्यालयों में समुचित समन्वय नहीं हो रहा था। ऐसे में अतिरिक्त शिक्षा निदेशक बेसिक का पद सृजित करके मुख्यालय लखनऊ से इलाहाबाद स्थानांतरित किया गया था। उस समय आठ जून 1972 तक ही यह बदलाव होना था लेकिन, कार्यालय आने में चार वर्ष लग गए। 15 मई 1978 को मुख्यालय स्थानांतरित हो पाया। तब से अनवरत यहीं से संचालन होता रहा।

    सृजित पदों पर आधे ही अफसर-कर्मी

    परिषद मुख्यालय पर सचिव, संयुक्त सचिव, उप सचिव, प्रधान सहायक, प्रधान लिपिक, ज्येष्ठ लिपिक, कनिष्ठ लिपिक, नैत्यिक लिपिक, आशुलिपिक, ड्राइवर, दफ्तरी व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों सहित कुल 36 पद स्वीकृत हैं। उनमें से इन दिनों मात्र 18 ही कार्यरत हैं। इसी परिसर में वित्त नियंत्रक बेसिक शिक्षा परिषद का भी कार्यालय है। वहां वित्त नियंत्रक, वरिष्ठ लेखाधिकारी सहित कुल 38 पद स्वीकृत हैं लेकिन, नियुक्त मात्र 20 हैं।

    अब फिर बदली तस्वीर : 41 साल पहले जिस वजह से परिषद मुख्यालय लखनऊ से प्रयागराज भेजा गया था, वही तस्वीर इधर फिर बनी है। बेसिक शिक्षा कार्यालय लखनऊ में अक्सर बैठकें होती हैं, इसमें परिषद के अफसरों की उपस्थिति रहती है। सचिव, वित्त नियंत्रक आदि को इन बैठकों में शामिल होने के लिए लखनऊ भागना पड़ता है। इससे कई बार प्रकरणों का त्वरित निस्तारण नहीं हो पाता है। मुख्यालय लखनऊ में होने से उपस्थिति व सूचनाएं तेजी से पहुंच सकती हैं। इसलिए सचिव परिषद रूबी सिंह ने प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। दो जून 1990 को परिषद मुख्यालय इलाहाबाद से लखनऊ करने की पहल हुई थी लेकिन, विरोध के कारण तत्कालीन शिक्षा निदेशक ने सहमति नहीं दी थी।