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    Monday, 12 August 2019

    shiksha mitra up का samayojan रद्द करने वाले judgement के खिलाफ दाखिल शिक्षा मित्रों की क्यूरेटिव याचिका खारिज

    shiksha mitra up का samayojan रद्द करने वाले judgement के खिलाफ दाखिल शिक्षा मित्रों की क्यूरेटिव याचिका खारिज



    शिक्षा मित्रों को सुप्रीम कोर्ट से एक बार फिर झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा मित्रों का सहायक शिक्षक के तौर पर समायोजन रद करने वाले फैसले के खिलाफ दाखिल शिक्षा मित्रों की क्यूरेटिव याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट पुनर्विचार याचिका पहले ही 30 जनवरी 2018 को खारिज कर चुका है। यह मामला प्रदेश में 172000 शिक्षा मित्रों को सहायक शिक्षक के तौर पर समायोजित करने का था।



    मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, एसए बोबडे, एनवी रमना और यूयू ललित की पीठ ने गत छह अगस्त को उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ की ओर से दाखिल क्यूरेटिव याचिका खारिज कर दी थी लेकिन फैसला वेबसाइट पर बाद मे उपलब्ध हुआ। कोर्ट ने आदेश में कहा है कि उन्होंने याचिका और उसके साथ दाखिल दस्तावेजों पर गौर किया जिसमें पाया कि यह मामला क्यूरेटिव याचिका पर विचार करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में तय मानकों में नहीं आता इसलिए याचिका खारिज की जाती है। पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद शिक्षा मित्रों ने क्यूरेटिव याचिकाएं दाखिल की थीं। संघ के वकील गौरव यादव का कहना है कि कोर्ट का जो भी फैसला है हमें स्वीकार है लेकिन वे शिक्षामित्रों के हित में राज्य सरकार से गुहार जारी रखेंगे।


    सुप्रीम कोर्ट ने 25 जुलाई 2017 को प्रदेश में प्राथमिक विद्यालयों में सहायक शिक्षक के तौर पर शक्षामित्रों के समायोजन को रद करने के हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया था लेकिन मामले की विशिष्ट परिस्थितियों को देखते हुए कहा था कि अगर शिक्षामित्र जरूरी योग्यता हासिल कर लेते हैं तो उन्हें लगातार दो बार के भर्ती विज्ञापनों में मौका दिया जायेगा। उन्हें आयु में छूट मिलेगी साथ ही उनके अनुभव को भी प्राथमिकता दी जाएगी। कोर्ट ने कहा था कि जबतक उन्हे ये मौका मिलता है तबतक राज्य सरकार चाहे तो उन्हें समायोजन से पहले की शर्तो के आधार पर शिक्षामित्र के रूप में काम करने दे सकती है। 



    कोर्ट ने कहा था कि शिक्षा मित्रों का कैरियर बच्चों को मिलने वाली मुफ्त और गुणवत्ता की शिक्षा की शर्त पर नहीं हो सकता। कोर्ट ने हाईकोर्ट से सहमति जताते हुए कहा था कि कानून के मुताबिक नियुक्ति के लिए 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना से न्यूनतम योग्यता जरूरी है। न्यूनतम योग्यता के बगैर किसी नियुक्त की अनुमति नहीं दी जा सकती। ये सारी नियुक्तियां उपरोक्त तिथि के बाद हुई हैं। 



    shiksha mitra up का samayojan रद्द करने वाले judgement के खिलाफ दाखिल शिक्षा मित्रों की क्यूरेटिव याचिका खारिज
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