1 अक्टूबर को प्रदेश के बच्चे पढ़ेंगे बुज़ुर्गों का सम्मान करने का पाठ, अंतराष्ट्रीय विश्व वृद्ध दिवस के बारे में जाने - प्राइमरी का मास्टर - UPTET | Primary Ka Master | Basic Shiksha News | Shiksha Mitra News
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    Sunday, 15 September 2019

    1 अक्टूबर को प्रदेश के बच्चे पढ़ेंगे बुज़ुर्गों का सम्मान करने का पाठ, अंतराष्ट्रीय विश्व वृद्ध दिवस के बारे में जाने


    • अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा ने डीएम व बीएसए को भेजा पत्र, हर स्कूल में होगा अनिवार्य
    • 1 अक्टूबर को सभी स्कूलों में होंगे आयोजन
    • बुज़ुर्गों के प्रति आदर सत्कार की भावना को जागृत करने के लिए हो रहा आयोजन

    1 अक्टूबर को प्रदेश के बच्चे पढ़ेंगे बुज़ुर्गों का सम्मान करने का पाठ, अंतराष्ट्रीय विश्व वृद्ध दिवस के बारे में जाने


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    1 अक्टूबर को प्रदेश के बच्चे पढ़ेंगे बुज़ुर्गों का सम्मान करने का पाठ, अंतराष्ट्रीय विश्व वृद्ध दिवस के बारे में जाने

    1 अक्टूबर को प्रदेश के बच्चे पढ़ेंगे बुज़ुर्गों का सम्मान करने का पाठ, मनाया जाएँगे अंतराष्ट्रीय विश्व वृद्ध दिवस

    अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस के बारें में जाने - 

    अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस (अंग्रेज़ीInternational Day Of Older Persons) अथवा 'अंतरराष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस' अथवा 'अंतरराष्ट्रीय वरिष्‍ठ नागरिक दिवस' अथवा 'विश्व प्रौढ़ दिवस' अथवा 'अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस' प्रत्येक वर्ष '1 अक्टूबर' को मनाया जाता है। इस अवसर पर अपने वरिष्‍ठ नागरिकों का सम्मान करने एवं उनके सम्बन्ध में चिंतन करना आवश्यक होता है। आज का वृद्ध समाज अत्यधिक कुंठा ग्रस्त है और सामान्यत: इस बात से सर्बाधिक दु:खी है कि जीवन का विशद अनुभव होने के बावजूद कोई उनकी राय न तो लेना चाहता है और न ही उनकी राय को महत्व ही देता है। इस प्रकार अपने को समाज में एक तरह से  निष्प्रयोज्य समझे जाने के कारण हमारा वृद्ध समाज सर्बाधिक दु:खी रहता है। वृद्ध समाज को इस दुःख और संत्रास से छुटकारा दिलाना आज की सबसे बड़ी जरुरत है। इस दिशा में ठोस प्रयास किये जाने की बहुत आवश्यकता है।

    शुरुआत

    संयुक्त राष्ट्र ने विश्व में बुजुर्गों के प्रति हो रहे दुर्व्यवहार और अन्याय को समाप्त करने के लिए और लोगों में जागरुकता फैलाने के लिए 14 दिसम्बर1990 को यह निर्णय लिया कि हर साल '1 अक्टूबर' को 'अंतरराष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस' के रूप में मनाकर हम बुजुर्गों को उनका सही स्थान दिलाने की कोशिश करेंगे। 1 अक्टूबर, 1991 को पहली बार 'अंतरराष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस' मनाया गया, जिसके बाद से इसे हर साल इसी दिन मनाया जाता है।

    गोष्ठियाँ तथा सम्मेलन

    वृद्धों की समस्या पर 'संयुक्त राष्ट्र महासभा' में सर्वप्रथम अर्जेंटीना ने विश्व का ध्यान आकर्षित किया था। तब से लेकर अब तक वृद्धों के संबंध में अनेक गोष्ठियां और अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन हो चुके हैं। वर्ष 1999 को अंतर्राष्ट्रीय बुजुर्ग-वर्ष के रूप में भी मनाया गया। इससे पूर्व 1982 में 'विश्व स्वास्थ्य संगठन' ने "वृद्धावस्था को सुखी बनाइए" जैसा नारा दिया और "सबके लिए स्वास्थ्य" का अभियान प्रारम्भ किया गया।

    संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1 अक्तूबर को ‘अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध-दिवस’ के रूप में घोषित किया हुआ है और इस रूप में विश्वभर में इसका आयोजन भी किया जाता है। इन सब बातों से वृद्ध व्यक्तियों के प्रति लोगों में सम्मान और संवेदना के भाव जागे और उनके स्वास्थ्य तथा आर्थिक समस्याओं के समाधान पर विशेष ध्यान दिया गया। वृद्धावस्था की बीमारियों के लिए अनेक औषधियों का आविष्कार किया गया और अनेक स्थानों पर अस्पतालों में उनके लिए विशेष व्यवस्था की गयी।

    लगभग सभी पश्चिमी देशों में आर्थिक समस्या से जूझते वृद्धों के लिए पर्याप्त पेंशन की व्यवस्था की गयी है, जिससे उनका खर्च आराम से चल जाता है। वहां के बुजुर्गों के सामने अब सामान्यत: आर्थिक संकट नहीं है। उनके सामने स्वास्थ्य के अतिरिक्त मुख्य समस्या अकेलेपन की है। वयस्क होने पर बच्चे अलग रहने लगते हैं और केवल सप्ताहान्त या अन्य विशेष अवसरों पर ही वे उनसे मिलने आते हैं। कभी-कभी उनसे मिले महीने या वर्ष भी गुजर जाते हैं। बीमारी के समय उन्हें सान्त्वना देेने वाला सामान्यत: उनका कोई भी अपना उनके पास नहीं होता।

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