मनाए असली दशहरा अशोक विजया दशमी, what is ashok vijaya dashmi asli vijaya dhasmi dashahara special - प्राइमरी का मास्टर - UPTET | Primary Ka Master | Basic Shiksha News | Shiksha Mitra News
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    Tuesday, 8 October 2019

    मनाए असली दशहरा अशोक विजया दशमी, what is ashok vijaya dashmi asli vijaya dhasmi dashahara special

    मनाए असली दशहरा अशोक विजया दशमी, what is ashok vijaya dashmi asli vijaya dhasmi dashahara special

    what is ashok vijaya dashmi asli vijaya dhasmi - सम्राट अशोक के कलिंग युद्ध में विजयी होने के दसवें दिन मनाये जाने के कारण इसे अशोक विजयदशमी कहते हैं। इसी दिन सम्राट अशोक ने बौद्ध धम्म की दीक्षा ली थी।विजय दशमी बौद्धों का पवित्र त्यौहार है। ऐतिहासिक सत्यता है कि महाराजा अशोक कलिंग युद्ध के बाद हिंसा का मार्ग त्याग कर बुद्ध धम्म अपनाने की घोषणा कर दी थी।

    बौद्ध बन जाने पर वह बौद्ध स्थलों की यात्राओ पर गए। भगवान बुद्ध के जीवन को चरितार्थ करने तथा अपने जीवन को कृतार्थ करने के निमित्त हजारो स्तुपो ,शिलालेखो ,धम्म स्तम्भो का निर्माण कराया। अशोक की इस धार्मिक परिवर्तनसे खुश होकर देश की जनता ने उन सभी स्मारकों को सजाया -सवारा तथा उस पर दीपोत्सव किया। यह आयोजनहर्षोलास के साथ १० दिनों तक चलता रहा, दसवे दिन महाराजा ने राजपरिवार के साथ पूज्य भंते मोग्गिलिपुत्त तिष्य से धम्म दीक्षा ग्रहण किया।
    धम्म दीक्षा के उपरांत महाराजा ने प्रतिज्ञा किया कि आज के बाद हम शास्त्रो से नही बल्कि शांति और अहिंसा से प्राणी मात्र के दिलो पर विजय प्राप्त करूँगा। इसीलिए सम्पूर्ण बौद्ध जगत इसे अशोक विजय दशमी के रूप में मनाता है।
    लेकिन ब्राह्मणो ने इसे काल्पनिक राम और रावण कि विजय बता कर हमारे इस महत्त्वपूर्ण त्यौहार पर कब्ज़ा कर लिया है।
    मनाए असली दशहरा अशोक विजया दशमी, what is ashok vijaya dashmi asli vijaya dhasmi dashahara special

    जहां तक दशहरे की बात है तो इससे जुड़ा तथ्य यह है कि चन्द्रगुप्त मौर्य से लेकर मौर्य साम्राज्य के अंतिम शासक बृहद्रथ मौर्य तक कुल दस सम्राट हुए। अंतिम सम्राट बृहद्रथ मौर्य की उनके सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने हत्या कर दी और “शुंग वंश” की स्थापना की।
    पुष्यमित्र शुंग ब्राह्मण था। इस समाज ने इस दिन बहुत बड़ा उत्सव मनाया। उस साल यह अशोक विजयदशमी का ही दिन था। उन्होंने “अशोक” शब्द को हटा दिया और जश्न मनाया।
    इस जश्न में मौर्य वंश के 10 सम्राटों के अलग-अलग पुतले न बनाकर एक ही पुतला बनाया और उसके 10 सर बना दिए और उसका दहन किया।
    2500 साल के सम्राट अशोक के विरासत से जोड़ते हुए 14 अक्टूबर 1956 को अशोक विजयदशमी के दिन ही डा बी.आर. अम्बेडकर ने दीक्षा भूमि, नागपुर, भारत में ऐतिहासिक बौद्ध धर्मं में परिवर्तन के अवसर पर,14 अक्टूबर 1956 को अपने अनुयायियों के लिए 22 प्रतिज्ञाएँ निर्धारित कीं ।
    800000 लोगों का बौद्ध धर्म में रूपांतरण ऐतिहासिक था क्योंकि यह विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक रूपांतरण था.उन्होंने इन शपथों को निर्धारित किया ताकि हिंदू धर्म के बंधनों को पूरी तरह पृथक किया जा सके.ये 22 प्रतिज्ञाएँ हिंदू मान्यताओं और पद्धतियों की जड़ों पर गहरा आघात करती हैं. ये एक सेतु के रूप में बौद्ध धर्मं की हिन्दू धर्म में व्याप्त भ्रम और विरोधाभासों से रक्षा करने में सहायक हो सकती हैं.इन प्रतिज्ञाओं से हिन्दू धर्म,जिसमें केवल हिंदुओं की ऊंची जातियों के संवर्धन के लिए मार्ग प्रशस्त किया गया, में व्याप्त अंधविश्वासों, व्यर्थ और अर्थहीन रस्मों, से धर्मान्तरित होते समय स्वतंत्र रहा जा सकता है । 

    बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर (dr. bhimrao ambedkar) द्वारा धम्म परिवर्तन के अवसर पर अनुयायियों को 22 प्रतिज्ञाएँ दिलाई गयीं - 

    प्रसिद्ध 22 प्रतिज्ञाएँ निम्न हैं -


    1. मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश में कोई विश्वास नहीं करूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा
    2. मैं राम और कृष्ण, जो भगवान के अवतार माने जाते हैं, में कोई आस्था नहीं रखूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा
    3. मैं गौरी, गणपति और हिन्दुओं के अन्य देवी-देवताओं में आस्था नहीं रखूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा ।
    4. मैं भगवान के अवतार में विश्वास नहीं करता हूँ ।
    5. मैं यह नहीं मानता और न कभी मानूंगा कि भगवान बुद्ध विष्णु के अवतार थे । मैं इसे पागलपन और झूठा प्रचार-प्रसार मानता हूँ ।
    6. मैं श्रद्धा (श्राद्ध) में भाग नहीं लूँगा और न ही पिंड-दान दूँगा ।
    7. मैं बुद्ध के सिद्धांतों और उपदेशों का उल्लंघन करने वाले तरीके से कार्य नहीं करूँगा ।
    8. मैं ब्राह्मणों द्वारा निष्पादित होने वाले किसी भी समारोह को स्वीकार नहीं करूँगा ।
    9. मैं मनुष्य की समानता में विश्वास करता हूँ ।
    10. मैं समानता स्थापित करने का प्रयास करूँगा ।
    11. मैं बुद्ध के आष्टांगिक मार्ग का अनुशरण करूँगा ।
    12. मैं बुद्ध द्वारा निर्धारित परमितों का पालन करूँगा ।
    13. मैं सभी जीवित प्राणियों के प्रति दया और प्यार भरी दयालुता रखूँगा तथा उनकी रक्षा करूँगा.
    14. मैं चोरी नहीं करूँगा ।
    15. मैं झूठ नहीं बोलूँगा ।
    16. मैं कामुक पापों को नहीं करूँगा ।
    17. मैं शराब, ड्रग्स जैसे मादक पदार्थों का सेवन नहीं करूँगा.
    18. मैं महान आष्टांगिक मार्ग के पालन का प्रयास करूँगा एवं सहानुभूति और प्यार भरी दयालुता का दैनिक जीवन में अभ्यास करूँगा.
    19. मैं हिंदू धर्म का त्याग करता हूँ जो मानवता के लिए हानिकारक है और उन्नति और मानवता के विकास में बाधक है क्योंकि यह असमानता पर आधारित है, और स्व-धर्मं के रूप में बौद्ध धर्म को अपनाता हूँ ।
    20. मैं दृढ़ता के साथ यह विश्वास करता हूँ की बुद्ध का धम्म ही सच्चा धर्म है ।
    21. मुझे विश्वास है कि मैं फिर से जन्म ले रहा हूँ (इस धर्म परिवर्तन के द्वारा).
    22. मैं गंभीरता एवं दृढ़ता के साथ घोषित करता हूँ कि मैं इसके (धर्म परिवर्तन के) बाद अपने जीवन का बुद्ध के सिद्धांतों व शिक्षाओं एवं उनके धम्म के अनुसार मार्गदर्शन करूँगा.
    सभी मित्रों को ”अशोक विजयदशमी” की बहुत-बहुत बधाई! बताइए सबको अशोक विजया दशमी के बारे में!
    संदर्भ स्रोत - velivada

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