शिक्षा का अधिकार के तहत निजी स्कूलों ने ग़रीबों के एडमिशन पर खड़े किए हाथ, पिछले साल की अभी नही मिली फ़ीस, - प्राइमरी का मास्टर - UPTET | Primary Ka Master | Basic Shiksha News | Shiksha Mitra News लॉकडाउन के दौरान पढ़ाई कैसे इस सम्बन्ध में टिप्स : इस समय हमारा देश नावेल कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी से जूझ रहा है । पूरे देश में लॉकडाउन के कारण स्कूल बंद हैं । जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है । ऐसे में शिक्षक मोबाइल द्वारा अभिभावकों व बच्चों से बात करें । उन्हें कोरोना वायरस से बचाव के तरीके बताएं ।बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करें । शिक्षा विभाग द्वारा जारी एजुकेशनल ऐप Diksha, E-Pathshala, Nishtha ऐप में डिजिटल पठन पाठन सामग्री है । ये Google Play Store में उपलब्ध हैं । स्मार्टफोन में डाउनलोड कर अभिभावकों से बच्चों को घर पर ही पढ़ाई के लिए प्रेरित करें । यूनिसेफ द्वारा प्रायोजित "मीना की दुनिया" व " फुल ऑन निक्की" रेडियो कार्यक्रम सुनाएं । उनके साथ शैक्षिक गेम जैसे पहेली आदि खेले,आलेख, सुलेख, चित्रकला संबंधी गतिविधियाँ कराएँ ।
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    Monday, 16 March 2020

    शिक्षा का अधिकार के तहत निजी स्कूलों ने ग़रीबों के एडमिशन पर खड़े किए हाथ, पिछले साल की अभी नही मिली फ़ीस,

    बेसिक शिक्षा परिषद न्यूज हिंदी : निजी स्कूलों ने शिक्षा का अधिकार का अधिनियम के अंतर्गत दुर्बल आय वर्ग के बच्चों का एडमिशन लेने से मना कर दिया है । अप्रैल से शुरू हो रहे नए शैक्षिक सत्र 2020-21 के लिए निजी पब्लिक स्कूल ग़रीबों का प्रवेश नही नही ले रहें हैं । उनका कहना है की विगत वर्ष की प्रतिपूर्ति फ़ीस सरकार द्वारा अभी तक नही मिली है । इसलिए वह नए सत्र में एक भी दाख़िला आरटीई के तहत नही लेंगे ।
    शिक्षा का अधिकार के तहत निजी स्कूलों ने ग़रीबों के एडमिशन पर खड़े किए हाथ, पिछले साल की अभी नही मिली फ़ीस,

    शिक्षा का अधिकार के तहत निजी स्कूलों ने ग़रीबों के एडमिशन पर खड़े किए हाथ, पिछले साल की अभी नही मिली फ़ीस


    यह जानकारी इंडिपेंडेंट स्कूल फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष डा0 मधुसूदन दीक्षित ने दी । सरकार और नजी स्कूलों के खीचतान में नुक़सान गरीब छात्रों को हाई उठाना पड़ रहा है । साल से करोड़ों अरबों कमाने वाले निजी स्कूल क्या दो चार गरीब बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा नही दे सकते हैं ? यह पे बैक टू सोसायटी पर उनका कुछ फ़र्ज़ नही बनता है ? साल भर में तरह तरह की फ़ीस मनमाने ढंग से वसूलने वालों को व्यवसाय से बढ़कर समाज के लिए सोचना चाहिए । यह अपने अपने आपमें एक बड़ा सवाल है 

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