प्राइमरी का मास्टर - परीक्षा एकेडमिक हो या प्रतियोगी उसका पाठ्यक्रम तय होता है। इम्तिहान में वही प्रश्न पूछे जाने का नियम भी है, जिसकी पढ़ाई कराई गई या की गई है। शैक्षिक और परीक्षा संस्थाएं लिखित परीक्षाओं में पाठ्यक्रम की सीमा रेखा अक्सर पार कर जाती हैं। यूपी बोर्ड की परीक्षा में भी ऐसे प्रश्न पूछे जा चुके हैं, जिन पर खास वर्ग ने गंभीर आपत्ति जताई। 69000 शिक्षक भर्ती में प्रश्नों का विवाद इन दिनों जगजाहिर है। शिक्षाविद् कहते हैं कि तय पाठ्यक्रम के साथ ही ऐसे प्रश्न जिनके उत्तर विकल्प अधिक न हों, पूछे जाने पर ही विवाद का अंत होगा।प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा संस्था उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग ने भी एक नहीं कई मर्तबा उत्तरकुंजी के साथ प्रश्नों को खुद डिलीट किया है। उससे भी बात नहीं बनी और कई प्रश्नों पर प्रकरण कोर्ट तक पहुंचे हैं। माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड उप्र, उप्र उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग भी विवादित प्रश्न पूछकर किरकिरी करा चुके हैं।
परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय में तो इधर की लगभग सभी परीक्षाओं में प्रश्नों का विवाद रहा और उसका पटाक्षेप कोर्ट जाकर ही हुआ है। यूपी बोर्ड के स्कूलों में पाठ्यक्रम में चरणबद्ध तरीके से बदलाव हो रहा है। वहीं, बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में भी एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू करने की प्रक्रिया गतिमान है। इन भगीरथ प्रयासों को मंजिल तभी मिल सकेगी जब प्रश्न भी पाठ्यक्रम आधारित हों। 69000 शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा में हंिदूी के तीन प्रश्न ऐसे पूछे गए जो पाठ्यक्रम के नहीं थे। अंतिम उत्तरकुंजी में उन्हें हटाकर सभी को कामन अंक दिया गया। इसके बाद भी प्रश्नों के विवाद का अंत नहीं हो रहा है।