उत्तर प्रदेश के कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में नियुक्ति पाने वाली सिर्फ एक अनामिका शुक्ला अब तक सामने आई है। राज्य के निजी डीएलएड कॉलेजों में तो दर्जनों ऐसे नटवरलाल कार्यरत हैं। 


लखनऊ । उत्तर प्रदेश के कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में नियुक्ति पाने वाली सिर्फ एक अनामिका शुक्ला अब तक सामने आई है। आपको बता दें कि राज्य के निजी डीएलएड (डिप्लोमा इन एलीमेंटरी एजूकेशन) कॉलेजों में तो दर्जनों ऐसे नटवरलाल कार्यरत हैं। एक ही नाम व योग्यता का प्रमाणपत्र लगाकर वे कई कॉलेजों में शिक्षक व अन्य पदों पर लंबे समय से कार्य कर रहे हैं। 


अहम तथ्य यह है कि विभाग को भी इसकी पुष्ट सूचना है लेकिन, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान यानी डायट से रिपोर्ट मिलने का इंतजार किया जा रहा है। प्रदेश के 3100 से अधिक निजी डीएलएड (पूर्व बीटीसी) कॉलेजों में एक ही स्टाफ के कई जगह तैनाती की फौज मिलने के आसार हैं।



उत्तर प्रदेश में प्राथमिक स्तर के विद्यालयों के लिए शिक्षक तैयार करने का पाठ्यक्रम पहले बीटीसी और अब डीएलएड के नाम से संचालित है। हर जिले में सरकारी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान खुले हैं। करीब आठ साल पहले निजी कालेजों को भी डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित करने की संबद्धता प्रदान की गई। 


बड़ी संख्या में डीएलएड कालेज हर वर्ष खुलते गए, इस समय उनकी संख्या करीब 3100 से अधिक है। इन कॉलेजों को 50 या फिर 100 सीटें प्रवेश के लिए आवंटित की गई हैं। 50 सीट वाले कॉलेज में पढ़ाने के लिए आठ शिक्षकों की नियुक्ति का प्रावधान है। यदि सभी कॉलेजों को 50 सीट वाला माना जाए तो भी शिक्षकों की तादाद करीब 25 हजार पहुंचती है। इतने शिक्षक प्रदेश में उपलब्ध जरूर हैं लेकिन, कॉलेजों में तैनात नहीं हैं।


एक भी डायट ने नहीं भेजी रिपोर्ट : 23 जनवरी, 2020 को एक पत्र परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय प्रयागराज को मिला, इसमें कहा गया है कि निजी संस्थान में कार्यरत स्टॉफ एक से अधिक निजी डीएलएड संस्थानों में पंजीकृत हैं। इससे हड़कंप मचा और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद यानी एससीईआरटी ने यह निर्णय लिया कि निजी डीएलएड संस्थान में अनुमोदित व कार्यरत स्टॉफ का डाटा बेस तैयार किया जाए। 


सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी उत्तर प्रदेश ने डायट प्राचार्यों को 20 फरवरी को पत्र भेजा और दो मार्च तक डाटा बेस के लिए स्टाफ का विवरण मांगा। यह भी कहा गया कि प्रकरण महत्वपूर्ण है, त्वरित कार्रवाई की जाए। अब तक एक भी डायट ने रिपोर्ट नहीं भेजी है।


डायट की कृपा पर निजी कॉलेज : निजी डीएलएड कॉलेजों की गतिविधि संचालित करने का जिम्मा डायट पर है। कई निजी कॉलेज डायट की कृपा पर ही संचालित हैं। इसलिए डायट भी रिपोर्ट भेजने में तत्परता नहीं दिखा रहे हैं। विभाग असहाय बना है।


कालेज खुलते ही मांगेंगे रिपोर्ट : परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी का कहना है कि निजी कालेजों की रिपोर्ट मांगी गई है, कोरोना संक्रमण की वजह से रिपोर्ट नहीं आ सकी है, अब जुलाई में सभी से रिपोर्ट मांगेंगे।


यह है मामला : कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूलों में विज्ञान शिक्षिका के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया था। 25 जिलों में अनामिका शुक्ला नाम की शिक्षिका कार्य कर रही हैं। सभी के दस्तावेज भी एक ही हैं। तहकीकात के बाद कासगंज के फरीदपुर स्थित कस्तूरबा विद्यालय में कार्यरत शिक्षिका अनामिका शुक्ला को चार जून को नोटिस भेज स्पष्टीकरण मांगा गया। शनिवार को शिक्षिका बीएसए कार्यालय पहुंची। उसने अपने साथी से इस्तीफा भेजा और खुद बाहर कार में ही बैठी रही। 

जानकारी मिलने पर बाहर कार में बैठी शिक्षिका को भी पकड़ लिया गया। पूछताछ के दौरान प्रिया ने पुलिस को घंटों तक गुमराह किया। पहले अपना नाम अनामिका सिंह एवं पिता का नाम राजेश बताया लेकिन, जब पुलिस ने कई बार पूछताछ की तथा उसे समझाते हुए सच बताने के लिए कहा तो उसने अपना नाम प्रिया एवं पिता का नाम महीपाल सिंह निवासी नई बस्ती कायमगंज फर्रुखाबाद बताया।

कई जिलों में अनामिका पर दर्ज हुए मुकदमे : उत्तर प्रदेश के 25 जिलों में शासन को छका रही अनामिका शुक्ला पर आखिरकार शिकंजा कसना शुरू हो गया है। शनिवार को कई जिलों में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। फिलहाल कासगंज में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में कार्यरत एक 'अनामिका' को पुलिस ने बीएसए की तहरीर पर गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है।


ऐसे होता है कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में चयन

● विभाग रिक्त पदों के लिए जारी करता है विज्ञापन।
● बीएड एवं टीईटी होता है अनिवार्य।
● हाईस्कूल से बीएड तक के फीसद को जोड़कर निकालते हैं मेरिट।
● साक्षात्कार में होती है मूल अभिलेख की जांच।
● 22000 रुपये प्रतिमाह वर्तमान में है वेतन।
● केजीबी में ही रहती हैं शिक्षिकाएं, स्कूल की रसोई में करती हैं भोजन।