नई शिक्षा नीति - New Education Policy 2020-21 : जबरन नही थोपी जाएगी कोई भाषा

Nothing was done about the old trilingual formula, no language was made necessary

स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। पाली प्राकृत और पर्शियन जैसी लुप्त होती जा रही भाषाओं को बचाने के लिए विशेष कदम भी उठाए गए हैं।...

नई दिल्ली। नई शिक्षा नीति में स्थानीय संदर्भो और भाषाओं को पूरा स्थान मिलेगा। इसके तहत स्कूल में पांचवीं कक्षा तक स्थानीय भाषा में पढ़ाने का सुझाव है। वैसे यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी पर कोई भाषा नहीं थोपी जाएगी।
गौरतलब है कि त्रिभाषा फार्मूला लागू होने के बाद खासकर दक्षिणी राज्यों से विरोध का स्वर उठा था। उसके तहत स्कूलों में एक क्षेत्रीय भाषा, अंग्रेजी और हिंदी को स्थान दिया गया। विरोध के बाद इसे लचीला कर दिया गया और किसी भाषा को आवश्यक नहीं बनाया गया। यही व्यवस्था आगे भी लागू रहेगी।
New education policy emphasizes on promotion of local languages ​​and skills
स्थानीय भाषाओं और हुनर को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है। पाली, प्राकृत और पर्शियन जैसी लुप्त होती जा रही भाषाओं को बचाने के लिए विशेष कदम भी उठाए गए हैं।

The new education policy aims to promote the preservation and development of all Indian languages.
नई शिक्षा नीति में साफ कहा गया है कि इसका उद्देश्य सभी भारतीय भाषाओं के संरक्षण और विकास को बढ़ावा देना है। इसके लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसलेशन एंड इंटरप्रटेशन (आइआइटीआइ) बनाने का सुझाव दिया है।


Recommendation of creating special institutes at the national level to promote Indian languages ​​-
इसी तरह पाली, प्राकृत और पर्शियन के लिए अलग से ऐसे ही संस्थान बनाने का भी सुझाव दिया गया है। संस्कृत जहां हर स्तर पर उपलब्ध होगी वहीं विदेशी भाषा हायर सेकेंड्री के स्तर से उपलब्ध होगी।