नई दिल्‍ली। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर गुरुवार को सोशल मीडिया में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ ने पांचवीं कक्षा तक मातृभाषा में पढ़ाई की स्वीकृति को सराहा, तो कुछ ने नई नीति को कई अहम सुधारों से कोसों दूर बताया। तन्मयमंडल नामक ट्विटर यूजर ने लिखा, यह भारत को और अधिक रचनात्मक,
अधिक बुद्धिमान और प्रगतिशील बनाएगी। अनिल निगमनामक यूजर ने कांग्रेस के एक बयान पर सवाल उठाते हुएकहा किकांग्रेसका कहना है कि बिना अंग्रेजी बच्चे कैसे पढ़ेंगे ? तो उससे मेरा सवाल है कि चीन और रूस के बच्चे बिना अंग्रेजी के कैसे पढ़ते हैं और आज वे विकसित देश क्यों हैं 2 दीपज्योति चौधरी ने लिखा, अगर सही से लागू हुआ तो छठी कक्षा से कोडिंग एक अच्छा सुधार है। दीपिका नामक यूजर ने लिखा, कोरोना महामारी के बीच फैंसी शब्दों के साथ नई शिक्षा नीति को लाना असाधारण रूप से हास्यास्पद है। शैक्षणिक संस्थान चार माह से बंद हैं और सरकार ने यह तक सुनिश्चित नहीं किया है कि देश के हर छात्र को पढ़ने के लिए बराबर मौके एवं सुविधाएं मिलें।