अब यूपी पुलिस ने मांगी पुरानी पेंशन, नई पेंशन योजना को हाईकोर्ट में दी चुनौती up police old pension highcourt news

उत्तर प्रदेश पुलिस में कार्यरत हजारों कांस्टेबलों ने पुरानी पेंशन योजना बहाली की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ली है। याचिका दाखिल कर नई पेंशन योजना रद्द कर पुरानी पेंशन दिए जाने की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार और डीजीपी मुख्यालय को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह की मोहलत दी है। याचिका दाखिल करने वाले कांस्टेबल वर्ष 2004-05 बैच के हैं और ये प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनात हैं। जय नारायण व शिव प्रताप सिंह के लीडिंग केस पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एमएन भंडारी और न्यायमूर्ति एसएस शमशेरी की पीठ सुनवाई कर रही है।


कांस्टेबलों का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का तर्क था कि केंद्र सरकार द्वारा पारित निर्णय के क्रम में यूपी सरकार द्वारा वर्ष 2005 में नई पेंशन योजना लागू करना संविधान के प्रावधानों के प्रतिकूल है। वरिष्ठ अधिवक्ता का कहना था कि सरकार की नई पेंशन स्कीम संविधान के अनुच्छेद 21,14,16 व 39 के विपरीत होने के कारण असांविधानिक है, इसलिए नई पेंशन योजना संविधान की मंशा के प्रतिकूल होने के कारण रद्द की जाए। 

याचिका दाखिल करने वालों  मथुरा, आगरा, हापुड, गौतमबुद्धनगर,  मेरठ, गाजियाबाद, कानपुर नगर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर व बरेली में तैनात हजारों कांस्टेबल शामिल हैं। इन आरक्षियों की नियुक्ति सपा शासनकाल में हुई थी । इनकी नियुक्ति को बाद में  बसपा शासनकाल में निरस्त कर दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इन आरक्षियों को सेवा में पुन: बहाल किया गया था। बहाली के बाद सभी अपनी मूल नियुक्ति की तिथि से कार्यरत माने गए हैं। याचिका में कहा गया है कि सरकार ने उन्हें पुरानी पेंशन का लाभ न देकर कानूनी भूल की है, जबकि उनकी नियुक्ति नई पेंशन योजना लागू होने से पूर्व की मानी गई है। नई पेंशन स्कीम में इन्हें शामिल करना गलत व असांविधानिक है ।