बेसिक शिक्षक गैर शैक्षणिक ड्यूटी से परेशान, आधार सत्यापन से लेकर राशन वितरण तक मे लग जाती है ड्यूटी  Non Educational Duty 
प्राइमरी स्कूलों में भले ही अभी विद्यार्थी नहीं आ रहे हों लेकिन शिक्षक काम की अधिकता से परेशान हैं। ऑनलाइन प्रशिक्षण और कोरोना संक्रमण के कारण लगने वाली ड्यूटी समेत असाक्षरों की गणना, बीएलओ ड्यूटी, राशन बांटने जैसे काम उनके जिम्मे हैं। 


जनवरी के महीने पर दीक्षा पोर्टल पर उपलब्ध प्रशिक्षण उन्हें पूरा करना है। मसलन बच्चों की भाषा, गणित के मुख्य कौशल, बच्चों की बातचीत, गणित की शिक्षा पद्धति, बच्चों की कक्षा में सक्रिय भागीदारी, गणित में आकलन, पढ़ने-लिखने के शुरुआती व्यवहार समेत संख्याओं की शुरुआती समझ जैसे मॉड्यूल जनवरी में ही पूरे करने हैं।


एमडीएम के लिए कन्वर्जन कॉस्ट की सूची, असाक्षरों की गणना, बीएलओ ड्यूटी, बच्चों का आधार सत्यापन,  राशन कार्ड के लिए सत्यापन, राशन वितरण, कोरोना संक्रमण के लिए हो रहे सर्वे, दवा वितरण और अब कोरोना वैक्सीन तक में शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जा रही है। इसके अलावा स्कूल बैग,  जूते-मोजे का वितरण आदि का काम भी शिक्षकों के जिम्मे है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत शिक्षकों को पढ़ाई से इतर किसी काम में नहीं लगाया जा सकता। वहीं सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी है।


ज्यादातर शिक्षकों का कहना है कि विद्यार्थियों को पढ़ाने से ज्यादा इन पर ध्यान देना पड़ रहा है क्योंकि इसकी नियमित रिपोर्ट भेजनी होती है। वहीं ज्यादातर बच्चे ऑनलाइन पढ़ नहीं सकते तो हमने वर्कशीट वगैरह बनाई है लेकिन अब इतना समय नहीं कि गांव में जाकर उन्हें बच्चों को देकर समझाया जा सके। संतोष तिवारी, प्रदेश अध्यक्ष, विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन कहते हैं कि आरटीई एक्ट के तहत शिक्षकों से पढ़ाई से इतर काम नहीं करवाया जा सकता लेकिन उसे काम के बोझ से लाद दिया गया है। शिक्षकों को इन कामों से मुक्त किया जाना चाहिए।