अंतर्जनपदीय तबादला 2019 - ग्रामीण के शिक्षकों को शहरी स्कूलों में हुआ पदस्थापन, हड़बड़ी में हुई गड़बड़ी - Inter District Transfer School Allotment Mistake

परिषदीय शिक्षकों के ऑनलाइन पदस्थापन में बड़े पैमाने पर अनियमितता हुई है। यू- डायस के दो साल पुराने डाटा के कारण 10 से 12 फरवरी तक अंतरजनपदीय तबादले वाले शिक्षकों को दी गई ऑनलाइन पोस्टिंग में गड़बड़ी सामने आई है।

ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षकों को शहरी क्षेत्र का विद्यालय आवंटित कर दिया गया, जो सबसे बड़ी चूक है क्योंकि परिषदीय स्कूलों में ग्रामीण और नगर क्षेत्र के शिक्षकों का कैडर अलग अलग है। ये स्थिति पूरे प्रदेश में है।


सरकार ने 31 दिसंबर 2019 को प्रयागराज की नगर निगम सीमा का विस्तार करते हुए 207 गांवों को शामिल किया था। जबकि शिक्षकों का ऑनलाइन पदस्थापन 30 सितंबर 2019 के डाटा के आधार पर किया गया। वर्तमान में शहरी सीमा में शामिल जिन स्कूलों में शिक्षकों को तैनाती दी गई है उनमें कौड़िहार द्वितीय के प्राथमिक विद्यालय जलगांव व फुलवारी बाग, चाका के प्राथमिक विद्यालय धनुहा, चकचन्दपुर, पतेवरा और पूरे खनन जबकि बहादुरपुर का प्राथमिक विद्यालय झांसी शामिल है।

ये स्कूल 30 सितंबर 2019 को ग्रामीण क्षेत्र में थे। लेकिन 31 दिसंबर 2019 की अधिसूचना के बाद नगर क्षेत्र में शामिल हो गए। इसके अलावा अंग्रेजी माध्यम स्कूल में शिक्षकों का सीधे पदस्थापन कर दिया गया जबकि इन स्कूलों में शिक्षकों के तैनाती की पूरी प्रक्रिया एकदम भिन्न है। इनमें उरुवा के प्राथमिक विद्यालय कोटडा, खानपुर व टिकुली, मेजा के प्राथमिक विद्यालय मझौली व तेन्दुआ कला और शंकरगढ़ का प्रभाव धोरा कला आदि शामिल है। शिक्षकों की पर्याप्त संख्या होने के बावजूद और शिक्षक भेज दिए गए जबकि कई में शिक्षकों की कमी है। करछना का प्रावि करेहा अंग्रेजी माध्यम स्कूल है। यहां नियम विरुद्ध तरीके से 69000 भर्ती और अंतरजनपदीय तबादले में 7 शिक्षक भेज दिए गए। इस संबंध में सचिव बेसिक शिक्षा परिषद प्रताप सिंह बघेल से संपर्क नहीं हो सका।


हड़बड़ी में हुई बड़ी गड़बड़ी 

69000 भर्ती के पहले और दूसरे चरण में पदस्थापन के लिए नगर विस्तारित वाले स्कूलों को छोड़कर ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों का डाटा उठाते हुए पदस्थापन कर दिया गया। लेकिन अंतर जनपदीय तबादले से आए शिक्षकों के लिए 30 सितंबर 2019 का डाटा लिया गया। पहले प्रेरणा पोर्टल से पदस्थापन की कोशिश हुई लेकिन बाद में यह काम 9 फरवरी को एनआईसी को दे दिया गया । एनआईसी ने बेसिक शिक्षा निदेशक से सभी 75 जिलों के बीएसए से रिक्त पदों का सत्यापन मंगवाने को कहा। 10 फरवरी को बीएसए ने सत्यापित डाटा भेज दिया लेकिन प्रदेशभर के तकरीबन 1.60 लाख परिषदीय स्कूलों का डाटा समायोजित ( री शफल) नहीं किया जा सका। पदस्थापन के लिए शासन से इतना अधिक दबाव था कि बिना री- शफल किए पदस्थापन कर दिया गया जिसके कारण गड़बड़ियां हुई हैं।


मानक के विपरीत पदस्थापना करने से जिले में सैकड़ों स्कूल एकल रह गए हैं। इससे आरटीई का उलंघन हुआ है। भविष्य में एकल विद्यालय के कारण यदि शिक्षकों का समायोजन होगा तो संगठन उसका विरोध करेगा।
-देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव जिलाध्यक्ष प्राथमिक शिक्षक संघ