बेसिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को सीधे खातों में मिलेगा ड्रेस का पैसा, डीबीटी के माध्यम से अभिभावकों के खातों में जायेगा पैसा, शिक्षक संगठनों की मांग पर शासन का निर्देश - Uniform DBT 2021
लखनऊ : बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित स्कूलों में बच्चों को मुफ्त में दी जाने वाली यूनिफॉर्म, स्वेटर, जूते-मोजे और स्कूल बैग वितरण की आड़ में होने वाले खेल पर अंकुश लगाने के लिए अगले शैक्षिक सत्र से इन चीजों के एवज में धनराशि को सीधे बच्चों के अभिभावकों के बैंक खातों (डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर) में भेजने की कवायद शुरू हुई है। इस प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूरी दिलाने की तैयारी है। पाठ्य पुस्तकों और मिड-डे मील को डीबीटी के दायरे से बाहर रखा गया है।


परिषदीय विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को प्रत्येक शैक्षिक सत्र में निश्शुल्क सामग्री पर प्रतिवर्ष लगभग 1850 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। प्रत्येक बच्चे के लिए दो जोड़े यूनिफॉर्म की खातिर 600 रुपये और स्वेटर के लिए 200 रुपये की दर से रकम आवंटित की जाती है। वहीं जूते-मोजे और स्कूल बैग की आपूर्ति के लिए टेंडर आमंत्रित किए जाते हैं। स्कूलों में बच्चों की संख्या ज्यादा दिखाकर इन वस्तुओं के वितरण की आड़ में सरकारी धन की बंदरबांट के आरोप लगते रहे हैं। वहीं, सामग्री की खराब गुणवत्ता की शिकायतें भी मिलती रही हैं। इसलिए अब इस चीजों की रकम बच्चों के अभिभावकों के बैंक खाते में सीधे भेजने की योजना बना रहा है। ऐसी योजना गुजरात, बिहार समेत कुछ अन्य राज्यों में संचालित है।

किस मद में कितना खर्च

यूनिफॉर्म >> 950 करोड़ रुपये

स्वेटर >> 300 करोड़ रुपये

जूते-मोजे >>185 करोड़ रुपये

स्कूल बैग >>150 करोड़ रुपये