संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी की फर्जी डिग्री से प्राइमरी टीचर बनने वालों की बर्खास्तगी का बीएसए वाराणसी ने जारी किया आदेश - fake primary ka master terminated in up

Varanasi: संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी की फर्जी डिग्रियों के सहारे प्रदेश के 75 जिलों के प्राथमिक विद्यालयों में 1130 लोगों ने शिक्षक की नौकरी हासिल की है। इसमें  जिले के परिषदीय विद्यालयों में नौकरी कर रहे 26 शिक्षकों की डिग्री फर्जी पाई गई है। जल्द ही इन शिक्षकों की सेवा समाप्त हो सकती है। 



संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से बीएड की डिग्री प्राप्त करने वाले इन शिक्षकों का खुलासा एसआईटी की जांच में हुआ है। एसआईटी ने जांच रिपोर्ट उच्च शिक्षा विभाग को दोषियों पर कार्रवाई के लिए भेज दी है। अब इन शिक्षकों को बर्खास्त कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।


अनामिका शुक्ला मामले का खुलासा होने के बाद प्रदेश शासन ने जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी ने 2004 से 2014 के बीच प्राथमिक विद्यालयों में चयनित उन शिक्षकों के अभिलेखों का दोबारा सत्यापन कराया, जिन्होंने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से उपाधि हासिल की थी।

जिले में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की डिग्री पर शिक्षक की नौकरी करने वाले 315 शिक्षकों का डाटा सत्यापन के लिए भेजा गया था, जिसमें  इनमें 28 की डिग्री फर्जी मिली थी, जबकि दो अभिलेख संदिग्ध की श्रेणी में रखे गए हैं। अब इन 28 फर्जी डिग्रियों में से 26 पर सप्ताह भर में कार्रवाई की गाज गिर सकती है।
पहले भी मिल चुके हैं कई फर्जी शिक्षक
संपूर्णानंद संस्कृत विवि के फर्जी अभिलेख के आधार पर नौकरी पाने का मामला पहले भी कई बार आ चुका है। मई 2020 में भी आगरा विश्वविद्यालय से डिग्री हासिल करने वाली पांच शिक्षिकाओं को बर्खास्त किया गया था। इसके अलावा एक पैन कार्ड व आधार कार्ड पर अन्य जिलों में नौकरी कर रहे शिक्षकों पर भी कार्रवाई हो चुकी है। 
फर्जी डिग्री पर नौकरी करने वाले सभी शिक्षकों के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई करते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। साथ ही आहरित की गई धनराशि की रिकवरी होगी। - राकेश सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी