कोरोना जैसी आपदा में भी निजी स्कूल मनमानी करने से बाज,  ऑनलाइन क्लास में भी यूनिफॉर्म में बेठें स्कूली बच्चे अन्यथा कटेगा नाम - private school latest news in hindi

प्रयागराज। कोरोना जैसी आपदा में भी निजी स्कूल मनमानी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। उन्होंने पहले फीस बढ़ाई और अब अभिभावकों पर दबाव बना रहे हैं कि वह बच्चों को स्कूल ड्रेस में ऑनलाइन क्लास में शामिल करें। स्कूलों की ओर से
ड्रेस बनाने वाले और इसकी बिक्री करने वाले दुकानदारों के दबाव में बच्चों को यूनिफार्म पहन कर बैठने का नियम थोपा जा रहा है। स्कूलों द्वारा अभिभावकों को भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि बिना ड्रेस के ऑनलाइन क्लास में शामिल नहीं किया जाएगा। अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों को कमीशन देने वाली दुकानों के दबाव में नया नियम लागू किया जा रहा है।

 अभिभावकों का कहना है कि पिछले वर्ष कोरोना संक्रमण के चलते स्कूलों को ड्रेस सप्लाई करने वाली एजेंसियों एवं दुकानदारों की कोरोड़ों की तैयार ड्रेस आज भी उनकी गोदाम में पड़ी है। इस तैयार माल को खपाने के लिए स्कूलों को मोटी कमीशन देने वाली एजेंसियों ने दबाव बनाया है कि वह किसी तरह से यूनिफॉर्म को अभिभावकों को बेचें। लगातार दूसरे साल स्कूल नहीं जाने से अधिकांश बच्चों की ड्रेस पुरानी और छोटी हो गई हैं, ऐसे में स्कूल वाले दबाव बनाएंगे तो अभिभावक मजबूरी में बच्चे को हित को देखते हुए ड्रेस खरीदेंगे। अभिभावकों का कहना है कि जब स्कूल वाले सबकुछ ऑनलाइन कर रहे हैं तो ड्रेस की अनिवार्यता क्यों लागू की जा रही है।
उनका कहना है कि आपदा के समय में हाईकोर्ट बंद है, बाजारों मे सन्नाटा है, निजी क्षेत्र में काम करने वालों की नौकरी पर खतरा है। बहुत सारे अभिभावकों की नौकरी चली गई है। ऐसे में स्कूलों के मनमाने नियम अभिभावकों पर भारी पड़ रहे
हैं। स्कूलों की मनमानी पर अंकुश के लिए डीआईओएस के पास समय नहीं प्रयागगाज। शहर के सीबीएसई, आईसीएसई से जुड़े स्कूलों में बच्चों से एक साथ तीन माह की फीस जमा करने के लिए कहा गया है, ऐसा न करने पर पेनाल्‍टी लगाने की चेतावनी दी गई है। अभिभावक अपनी शिकायत लेकर जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) आरएन विश्वकर्मा तक पहुंच रहे हैं। इसके बाद भी डीआईओएस कोई कार्वाई नहीं कर रहे हैं। डीआईओएस से जब इस संबंध में बात की गई तो उनका कहना है कि चुनाव में व्यस्त होने के चलते उनके पास समय नहीं है। अभिभावकों के सामने समस्या यह है स्लो लों की मनमानी की शिकायत करें। स्कूल वाले बच्चों के नाम काटने की धमकी दे रहे हैं।