Income Tax Returns Rules For AY 2018-19 in hindi । How to File Salary Break UP ITR 1 and ITR 2,3,& 4 । Benefits of E - Filling : What Do you Mean Income  Tax Return । आयकर रिटर्न नियम 2018

वित्तीय वर्ष 2017-18 (असेसमेंट ईयर 2018-19) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरने शुरू हो गए हैं। सरकार ने इस वर्ष आयकर रिटर्न भरने के नियमों में कई बदलाव किए हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि आयकर रिटर्न किसे भरना जरूरी है? आयकर रिटर्न के नए नियम क्या हैं? वर्ष 2017 की तुलना में वर्ष 2018 के नियमों में क्या बदलाव हुए हैं?


आयकर रिटर्न करने के नियम । How to file Income Tax Return 2018-19

किसे जरूरी है आयकर भरना (Who is Mandatory To file Return )

★ 60 वर्ष से कम के सभी ऐसे भारतीय नागरिकों को आयकर रिटर्न भरना अनिवार्य है, जिनकी आमदनी (gross total income) सालाना 2.5 लाख रुपए या इससे अधिक है।

★ सीनियर सिटिजन (जिनकी उम्र 60 से 80 वर्ष के बीच में है) उनकी सालाना आमदनी (gross total income) अगर 3 लाख रुपए से अधिक है तो उन्हें भी आयकर रिटर्न भरना अनिवार्य है।

★ सुपर सीनियर सिटिजन (जिनकी उम्र 80 वर्ष से अधिक है) अगर उनकी आमदनी (gross total income) सालाना 5 लाख रुपए से उूपर है तो उन्हें भी आयकर रिटर्न भरना अनिवार्य है।

 ★ अगर आपकी कोई कंपनी या फर्म है तो उसके नाम पर भी हर साल आयकर रिटर्न दाखिल होना अनिवार्य है। भले ही सालाना आमदनी कितनी भी कम हो या अधिक हो। यहां तक कि नुकसान हुआ हो तो भी उसके लिए आयकर रिटर्न भरा जाना अनिवार्य है।

★ अगर आपका टीडीएस ज्यादा कट गया है या फिर आपने स्वयं एडवांस टैक्स के माध्यम से ज्यादा टैक्स जमा कर दिया है तो उसका रिफंड पाने के लिए भी उस साल का आयकर रिटर्न भरा जाना अनिवार्य है।

★ अगर आपको पिछले वित्त वर्षों के दौरान आमदनी में कोई नुकसान झेलना पडा है तो उसे आगे के वर्षों में समायोजन हेतु carry forward करने के लिए भी आयकर रिटर्न भरना अनिवार्य है।

 ★ अगर आपको किसी कंपनी का शेयर बेचने में हुआ दीर्घकालिक मुनाफा long term capital gains. 2.5 लाख रुपए से ज्यादा हुआ है तो टैक्स छूट पाने के बावजूद इसकी सूचना आयकर रिटर्न में दी जानी अनिवार्य है। उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2017-18 तक शेयरों के लांग टर्म कैपिटल गेन्स को टैक्स छूट मिली हुई थी। लेकिन ऐसा मुनाफा पाने वाले के लिए रिटर्न भरना अनिवार्य है।

★ इसी प्रकार अगर आपने equity oriented mutual funds की यूनिट बेचकर या किसी बिजनेस ट्रस्ट की यूनिट बेचकर साल के दौरान 2.5 लाख रुपए से अधिक का long term capital gains कमाया है तो उसके लिए भी आयकर रिटर्न भरना अनिवार्य है । टैक्स छूट के बावजूद।

 ★ अगर आप भारतीय नागरिक हैं और आपको विदेश स्थि​त किसी संपत्ति या संस्था से वित्तीय लाभ प्राप्त हो रहा है तो भी आपको इनकम टैक्स रिटर्न भरना अनिवार्य है। ध्यान रखें य यह नियम NRI या RNOR पर लागू नहीं होता, क्योंकि वे विदेश की नागरिकता ले चुके हैं।

 ★ अगर आप भारतीय ​नागरिक हैं, लेकिन विदेश स्थित कोई अकाउंट अगर आपके हस्ताक्षर से संचालित होता है तो भी आपको आयकर रिटर्न भरना अनिवार्य है। यह नियम भी NRI या RNOR पर लागू नहीं होता, क्योंकि वे विदेश की नागरिकता ले चुके हैं।

★ आप भले ही NRI हों, अगर आपकी भारत में स्थित संसाधनों से सालाना 2.5 लाख रुपए से अधिक आमदनी हो रही है तो भी आपको आयकर रिटर्न भरना अनिवार्य है।

★ अगर आप विदेशी कंपनी हैं, लेकिन भारत में कारोबार करके उस देश के साथ किसी संधि के तहत कोई टैक्स छूट प्राप्त कर रही हैं तो भी आपको आयकर रिटर्न भरना अनिवार्य है।

★ अगर आपने किसी सामाजिक ट्रस्ट की संपत्ति बेचने से किसी प्रकार की आमदनी प्राप्त की है तो भी आपको आयकर रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है। इनमें जनहितकारी, धाार्मिक, राजनैतिक, ​शैक्षिक, चिकित्सा या अन्य ऐसे कार्यों में लगे ट्रस्टों की संपत्ति शामिल है।

★ कुछ विशेष देशों में जाने के लिए ​वीजा पाने के लिए भी आयकर रिटर्न की रसीद पेश करनी अनिवार्य होती है। हालांकि कुछ देशों में जाने के लिए इसकी जरूरत नहीं भी होती।

★ बैंकों या वित्तीय संस्थानों से लोन (घर, वाहन, बिजनेस वगैरह के लिए) या क्रेडिट कार्ड जारी कराने के लिए भी अक्सर आयकर रिटर्न की जरूरत पडती है।

आॅनलाइन या आॅफलाइन रिटर्न भरने के नियम (Rules for filling Return Online Or Offline ) :

आयकर विभाग न₹द्वारा सिर्फ दो श्रेणी के लोगों को आॅफलाइन रिटर्न भरने की छूट दी गयी है -

 1 - सुपर सीनियर सिटिजन या अति वरिष्ठ नागरिक,जिनकी उम्र 80 वर्ष से अधिक हो चुकी है ।

2 - छोटे करदाता ,जिनकी आमदनी 5 लाख रुपए सालाना से कम है।

इन दोनों कैटेगरी के अलावा सभी को आॅनलाइन ही आयकर रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है।

रिटर्न लेट भरने पर पेनाल्टी के नए नियम (New Rules in case Late Return Filling)

★ ध्यान रखें ! सामान्य करदाताओं को किसी वित्तीय वर्ष का वित्तीय रिटर्न उसके तुरंत बाद वाले वर्ष (Assesment year) की 31 जुलाई तक भरना होता है। इसके बाद भी लेट पेनाल्टी के साथ अगले 31 मार्च तक लेट रिटर्न भरा जा सकता है।  31 जुलाई के बाद अगर आप रिटर्न भरते हैं तो आपको निम्नलिखित शर्तों के हिसाब से पेनाल्टी भरनी पड़ेगा ।

★ आप 31 जुलाई 2018 के बाद 31 दिसंबर 2018 तक Late Return भरते हैं तो इसके साथ 5 हजार रुपए जुर्माना भी चुकाना होगा।

★ इसके बाद अगर आप 1 जनवरी 2019 से 31 मार्च 2019 तक इनकम टैक्स रिटर्न भरते हैं तो जुर्माना बढ़कर 10 हजार रुपए जमा करना होगा।

★ 31 मार्च 2019 तक भी अगर आप Income Tax Return नहीं दाखिल कर पाते हैं तो फिर इस वित्तीय वर्ष के लिए लेट रिटर्न भी नहीं दाखिल कर पाएंगे।

पर ध्यान रहे,अगर आपने टैक्स देनदारी बनने के बावजूद जानबूझकर टैक्स जमा नहीं किया है और Return भी दाखिल नहीं किया है तो आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

आयकर पेनाल्टी : जिनकी आमदनी 5 लाख रुपए से कम है,उन्हें सिर्फ 1000 रुपए ही पेनाल्टी देनी होगी।

● आईटीआर 1, 2, 3 और 4 में कई बदलाव ( Various Changes In ITR 1, 2, 3 & 4 for 2018-19 )

इस बार सामान्य करदाताओं की ओर से भरे जाने वाले फॉर्मों आईटीआर 1, आईटीआर 2, आईटीआर 3 और आईटीआर 4 में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। पहली बात तो यह कि पिछले साल (वर्ष 2017-18) के रिटर्न में नोटबंदी के दौरान जमा नकदी के संबंध में जो डिटेल देने को कहा गया था, इस बार के ​रिटर्न में हटा लिया गया है। इसके अलावा इनकम टैक्स रिटर्न भरने की पात्रताओं और आईटीआर फॉर्मों की संरचनाओं में भी कुछ बदलाव हुए हैं। हर फॉर्म के बदलाव आप अलग अलग शीर्षकों में देख सकते हैं।

आईटीआर 1 भरने के नए नियम व बदलाव
(New Rules for filling ITR-1 and Changes ) :

आईटीआर फॉर्म 1 ऐसे लोगों (individual/एचयूएफ नहीं) को भरना है, जिनकी आमदनी सेलरी, ए​क हाउस प्रॉपर्टी ओर अन्य स्रोतों से आमदनी .ब्याज वगैरह. पर ही आश्रित हो। लेकिन, सकल कुल सालाना आमदनी 50 लाख रुपए से अधिक नही होनी चाहिए। आईटीआर 1 में हुए प्रमुख बदलाव इस प्रकार हैं -

इस बार आईटीआर 1 अब सिर्फ भारतीय नागरिकों के लिए मान्य -

इस बार आईटीआर 1 सिर्फ भारत के निवासी नागरिकों के लिए रिजर्व कर दिया गया है। पिछले साल .असेसमेंट ईयर 2017-18 में, आईटीआर 1 को भारतीय नागरिकों (Residents), RNOR (Residents Not ordinarily resident. और गैर निवासी (Non-residents) सभी श्रेणी के नागरिक भर सकते थे।

एनआरआई और RNORs को अब फॉर्म ITR-2 के माध्यम से अपना रिटर्न भरना होगा। सेलरी के साथ सेलरी ब्रेक अप की भी जानकारी दें

इस बार आईटीआर 1 में सेलरी के साथ साथ आय संरचना break-up of salary को भी शामिल किया गया है। इसमें सेलरी के अलावा निम्नलिखित मदों की भी जानकारी अलग-अलग देनी है -

★ i. Salary (सभी भत्तों, परिलब्धियों और वेतन के बदले लाभों को छोडकर ।

★ ii Allowances not exempt (भत्ते जो टैक्स छूट प्राप्त नहीं है)

★ iii Value of perquisites (परिलब्धियों का मूल्य)

★ iv Profit in lieu of salary (वेतन के स्थान पर लाभ)

★ v Deductions u/s 16 (धारा 16 के अधीन कटौतियाां)

★ vi Income chargeable under the head ‘Salaries वेतन के अधीन चार्जेबल आय’ (i + ii + iii + iv – v)

पिछले साल तक सेलरी स्ट्रक्चर की जानकारी नहीं देनी होती थी। वह पहले से ही आपके नाम जारी फॉर्म 16 में दर्ज होती थी। लेकिन, रिटर्न में उनके डिटेल देने की जरूरत नहीं होती थी। सिंगल हाउस प्रॉपर्टी से आय का भी ब्रेक अप देना है

इस बार आईटीआर 1 में सिंगल हाउस प्रॉपर्टी से हुई इनकम का ब्रेक अप (संरचना) भी देना है।

★ i. Gross rent ( प्राप्त किराया. प्राप्त होने वाला किराया या प्राप्त होने योग्य किराया.)
★ ii Tax paid to local authorities स्थानीय प्राधिकरण को चुकाया गया टैक्स
★ iii Annual Value (i–ii)
★ iv 30% of Annual Value
★ v Interest payable on borrowed capital
★ vi Income chargeable under the head ‘House Property’

पिछले साल तक हाउस प्रॉपर्टी की आमदनी की संरचना की जानकारी सिर्फ आईटीआर 1 भरने वालों को देने की आवश्यकता नहीं थीं। हालांकि अन्य फॉर्म . ITR -2 या अन्य फॉर्म भरने वालों को इसकी जानकारी देना अनिवार्य था। मकान किराए पर टीडीएस का विवरण जोडा गया

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आईटीआर 1 में टीडीएस सेक्शन में भी बदलाव किया गया है। इस बार किराए पर कटे टीडीएस (TDS made on rent) के संबंध में डिटेल (Form 26QC) की भी जानकारी देनी है। ऐसे मामलों में संपत्ति स्वामी (Tenant) के पैन नंबर का उल्लेख करना भी अनिवार्य कर दिया गया है।

आईटीआर 2 भरने के नियम में बदलाव (New Rules for filling ITR-2 and Changes) -

जैसा कि उपर टेबल में हमने बताया ​कि आईटीआर 2 उन लोगों को भरना है, जिनकी आमदनी बिजनेस या पेशे से आमदनी “Profits and Gains from Business or Profession” से अलग किसी तरीके से होती है। जैसे कि कैपिटल गेन्स .संपत्ति, जमीन, घर, शेयर, जेवर वगैरह बेचने से हुआ लाभ. कृषि आय, वगैरह से। और वे करदाता भी जिनकी आमदनी सेलरी, एक हाउस प्रॉपर्टी व अन्य स्रोतों से 50 लाख या इससे अधिक हुई है। नए साल में इस फॉर्म में हुए बदलाव निम्नलिखित हैं -

सेलरी बेस्ड एनआरआई व आरएनओआर भी हुए शामिल -

आईटीआर 1 के बदलावों में हमने बताया कि सेलरी, सिंगल हाउस प्रॉपर्टी व अन्य स्रोतों से आमदनी पर आश्रित होते हुए भी एनआरआई व RNORs आईटीआर 1 के माध्यम से अपना रिटर्न दाखिल नहीं कर सकते। तो इन दोनों श्रेणी के लोगों को आईटीआर 2 के माध्यम से अपना रिटर्न दाखिल करना होगा।

● कारोबार व पेशे से आमदनी का कॉलम हटा -

फॉर्म के part B में जो “Profits and Gains from Business or Profession” का कॉलम होता था, उसे इस बार यहां से ​हटा लिया गया है।

बिजनेस पार्टनरशिप से आय अब आईटीआर 2 का हिस्सा नहीं -

इसी के साथ Schedule-IF (Income from Firm) और Schedule-BP (Business partnership)भी हटा दिए गए हैं। यानी कि बिजनेस पार्टनरशिप से आमदनी प्राप्त करने वाले अब आईटीआर 2 के माध्यम से आयकर रिटर्न नहीं भर पाएंगे। इन्हें अब आईटीआर 3 के माध्यम से आयकर रिटर्न भरना होगा।

Schedule AL के अंतर्गत “Interest held in the assets of a firm or association of persons (AOP) as a partner or member thereof” से संबंधित सूचनाओं को भी हटा लिया गया है। क्योंकि इस तरह की आमदनी की सूचना अब आईटीआर टू की बजाय आईटीआर 3 के माध्यम से दी जानी है।

मकान किराए के टीडीएस का विवरण जोडा गया -

फॉर्म आईटीआर 1 की तरह, आईटीआर 2 में भी टीडीएस सेक्शन में मकान किराए पर कटने वाले टीडीएस के संबंध में विवरण का हिस्सा नया जोड़ा गया है। इसके लिए आप Form 26QC की मदद ले सकते हैं, जिसमें मकान किराए पर टीडीएस के ​डिटेल होते हैं। साथ ही प्रॉपर्टी के स्वामी का पैन नंबर उल्लेख का प्रावधान भी जोडा गया है।

आईटीआर 3 भरने के नए नियम व बदलाव -
New Rules for filling ITR-3 and Changes

जैसा कि हमने उूपर बताया ​कि आईटीआर 3 ऐसे लोगों (individuals या HUF) को भरना है, जिनकी आमदनी बिजनेस या प्रोफेशन से होती है। इसमें थोडे बदलाव जो हुए हैं वे इस प्रकार हैं -

★ इसमें सामान्य जानकारियों वाले हिस्से में एक कॉलम Section 115H से संबंधित जोड़ा गया है।

★य​ह सेक्शन किसी पूर्व एनआरआई non-resident Indian के भारतीय नागरिकता ले लेने के बाद आयकर के दायरे में आने के संबंध में होता है। इसमें कुछ विशेष तरीकों से मिले लाभों की जानकारी दी गई है।

★ इसमें Schedule PL को भी बदलकर इसमें जीएसटी से संबंधित डिटेल भी शामिल किए गए हैं।

★ बिजनेस में हुए ह्रास (Depreciation) को अधिकतम 40% तक सीमित कर दिया गया है। ऐसा सभी ह्रास संबंधित schedules में किया गया है।

आईटीआर 4  भरने के नए नियम व बदलाव
(New Rules for filling ITR-4 and Changes) :

मूल रूप से आईटीआर 4 ऐसे लोगों के लिए होता है, जिनकी आमदनी अनुमान आधारित होती है .बिजनेस, कारोबार वगैरह से.। इस फॉर्म में इस बार दो मुख्य बदलाव हुए हैं।

    पहला यह कि आपको अपना जीएसटीआर नंबर दर्ज करना होगा। दूसरा अपने टर्नओवर. सकल कारोबार की जानकारी भी देनी होगी। जैसा कि आपकी ओर से दाखिल किए गए GST return में दी हुई है।

दूसरा यह ​कि फॉर्म में, करदाता से वित्तीय लेन-देन के संबंध में कुछ अतिरिक्त जानकारियों को मांगा गया है -

        ◆ बिजनेस पार्टनर्स या मेंबरों की पूंजी
        ◆ सिक्योर्ड लोन
        ◆ अनसिक्योर्ड लोन
       ◆ एडवांस
        ◆ फिक्स एसेटस

 
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